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बिहार के डेयरी क्षेत्र में ‘स्पेस तकनीक’ का शंखनाद: अब ISRO की मदद से होगा हरे चारे का मानचित्रण, दुग्ध उत्पादन में आएगी क्रांति

NDDB, COMFED और ISRO की त्रिकोणीय साझेदारी; राज्य के सभी 38 जिलों में शुरू हुआ वैज्ञानिक अध्ययन

Patna News: बिहार के डेयरी सेक्टर को आधुनिक और वैज्ञानिक बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) और बिहार राज्य दुग्ध सहकारी संघ (COMFED) ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के साथ मिलकर राज्य के सभी 38 जिलों में ‘हरा चारा मानचित्रण अध्ययन’ (Green Fodder Mapping) की शुरुआत की है।

​इस महत्वाकांक्षी परियोजना का विधिवत उद्घाटन आज पटना के होटल चाणक्य में आयोजित एक विशेष कार्यशाला सह प्रशिक्षण कार्यक्रम में किया गया।

रिमोट सेंसिंग और GIS तकनीक से बदलेगी पशुपालन की सूरत

​पशु संसाधन विभाग के सचिव  शीर्षत कपिल अशोक ने कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए कहा कि राज्य में दुग्ध उत्पादन को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए अंतरिक्ष तकनीक (रिमोट सेंसिंग एवं जीआईएस) का उपयोग अनिवार्य है।

​”चारे की सटीक उपलब्धता का डेटा होने से हम पशुपालकों के लिए बेहतर नीतियां बना सकेंगे।” – श्री शीर्षत कपिल अशोक, सचिव

 

दूध उत्पादन की लागत में आएगी भारी कमी

​कॉम्फेड के प्रबंध निदेशक समीर सौरभ (IAS) ने इस पहल के आर्थिक पहलुओं पर जोर देते हुए बताया:

  • लागत नियंत्रण: दुग्ध उत्पादन की कुल लागत का लगभग 70% हिस्सा केवल चारा और पशु आहार पर खर्च होता है।
  • सटीक आकलन: इसरो की तकनीक से यह पता चल सकेगा कि किस जिले में किस किस्म के चारे की पैदावार हो रही है और कहाँ कमी है।
  • बेहतर प्लानिंग: इससे पशुपालकों को सही समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज और सिंचाई की सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

प्रमुख डेयरी संघों ने लिया प्रशिक्षण

​कार्यशाला में बिहार के प्रमुख दुग्ध संघों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया, जिनमें शामिल थे:

  • VPMU (पटना), TIMUL (मुजफ्फरपुर)
  • DRMU (बरौनी), SMU (आरा)
  • बिहार शरीफ डेयरी परियोजना (नालंदा) के नोडल पदाधिकारी।

​प्रशिक्षण के दौरान गणनाकर्ताओं को बताया गया कि कैसे सैटेलाइट डेटा के माध्यम से चारे के क्षेत्रफल और किस्मों का विश्लेषण किया जाता है। एनडीडीबी कोलकाता के क्षेत्रीय प्रमुख डॉ. सब्यसाची रॉय ने भी वर्चुअल माध्यम से इस तकनीक की बारीकियों को साझा किया।

इस अध्ययन के 3 मुख्य उद्देश्य:

  1. डेटा आधारित नीति: चारे की फसल के क्षेत्रफल का सटीक वैज्ञानिक डेटा तैयार करना।
  2. बीज प्रबंधन: उच्च गुणवत्ता वाले चारे के बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
  3. सतत आपूर्ति: चारे की कमी वाले क्षेत्रों की पहचान कर वहां आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को मजबूत करना।

बिहार सरकार, एनडीडीबी और कॉम्फेड की यह संयुक्त पहल न केवल दुग्ध उत्पादन को अधिक लाभकारी बनाएगी, बल्कि राज्य के लाखों पशुपालकों की आय बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगी। अंतरिक्ष से लेकर जमीन तक की यह जुगलबंदी बिहार को डेयरी हब बनाने की ओर एक बड़ा कदम है।

विजय सिन्हा
विजय सिन्हाhttp://silktvnews.com
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