Bihar News: बिहार के राजनीतिक इतिहास में आज (14 अप्रैल, 2026) का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया। सूबे के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार ने आखिरकार अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। दोपहर बाद राजभवन पहुँचकर उन्होंने राज्यपाल सैयद अता हसनैन को अपना त्यागपत्र सौंपा, जिसके साथ ही बिहार की सत्ता की कमान अब नए हाथों में जाने का रास्ता साफ हो गया है।
राज्यसभा के रास्ते केंद्र की राजनीति में सक्रिय होंगे ‘सुशासन बाबू’
नीतीश कुमार का यह फैसला अचानक नहीं है। हाल ही में राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ लेने के बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि वे बिहार की सक्रिय राजनीति से विदा ले सकते हैं। अब उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वे दिल्ली की राजनीति में बड़ी भूमिका निभाएंगे। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि केंद्र में उनकी अनुभवी प्रशासनिक क्षमता का लाभ उठाया जाएगा।
कैबिनेट की आखिरी बैठक में छलका दर्द: मंत्रियों को कहा ‘शुक्रिया’
इस्तीफा देने से पहले नीतीश कुमार ने अपनी कैबिनेट की अंतिम बैठक की। इस बैठक में मौजूद मंत्रियों के अनुसार, माहौल काफी भावुक था।
- धन्यवाद ज्ञापन: मुख्यमंत्री ने अपने कार्यकाल के दौरान साथ देने वाले सभी सहयोगियों और अधिकारियों का आभार व्यक्त किया।
- भावुक क्षण: कई मंत्रियों ने इसे एक ‘युग का अंत’ बताया। नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार का विकास उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता रही है और आगे भी रहेगी।
बिहार के विकास का चेहरा रहे नीतीश
साल 2005 से शुरू हुआ नीतीश कुमार का सफर (बीच के कुछ महीनों को छोड़कर) बिहार की सड़कों, स्कूलों और कानून-व्यवस्था में सुधार के लिए जाना जाता है। महिलाओं के लिए पंचायती राज में आरक्षण और साइकिल योजना जैसे क्रांतिकारी फैसलों ने उनकी ‘सुशासन बाबू’ की छवि को मजबूत किया।
अब आगे क्या?
नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद अब सबकी निगाहें भाजपा और नई सरकार के गठन पर टिकी हैं। बिहार में पहली बार भाजपा की कमान में सरकार बनने की संभावनाओं ने राज्य की सियासी सरगर्मी को सातवें आसमान पर पहुँचा दिया है।


