Bhagalpur News: भागलपुर को उत्तर बिहार और सीमांचल से जोड़ने वाला ऐतिहासिक विक्रमशिला सेतु इस समय खुद ‘बीमार’ है। सेतु के क्षतिग्रस्त होने से न केवल पहिए थम गए हैं, बल्कि हजारों लोगों की दैनिक दिनचर्या पटरी से उतर गई है। प्रशासन ने नाव का विकल्प तो दिया है, लेकिन उफनती गंगा और अव्यवस्था के बीच यात्रियों का सफर अब ‘राम भरोसे’ है।
प्रशासनिक मुस्तैदी: कागजों पर पुख्ता इंतजाम
सेतु पर आवागमन बाधित होने के बाद जिला प्रशासन ने स्थिति को संभालने के लिए मोर्चा संभाला है। गंगा घाटों पर सुरक्षा और सुचारू परिचालन के लिए निम्नलिखित कदम उठाए गए हैं:
- मैजिस्ट्रेट की तैनाती: घाटों पर दंडाधिकारियों और पुलिस बल को तैनात किया गया है ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके।
- किराया नियंत्रण: यात्रियों के शोषण को रोकने के लिए प्रशासन ने सरकारी किराया दर निर्धारित की है।
- सुरक्षा मानक: नाव चालकों को ‘ओवरलोडिंग’ न करने की सख्त चेतावनी दी गई है।
ग्राउंड रिपोर्ट: दावों की पोल खोलती अव्यवस्था
सरकारी निर्देशों के बावजूद धरातल पर यात्रियों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। घाटों पर मची अफरा-तफरी प्रशासन के दावों पर सवालिया निशान खड़ा करती है:
1. घंटों का लंबा इंतजार
नावों की संख्या सीमित होने के कारण घाटों पर सुबह से ही लंबी कतारें लग जा रही हैं। ऑफिस जाने वाले कर्मचारी, मरीज और छात्र घंटों धूप में अपनी बारी का इंतजार करने को मजबूर हैं।
2. ओवरलोडिंग का खतरा बरकरार
भले ही प्रशासन ने सख्त निर्देश दिए हों, लेकिन यात्रियों की भारी भीड़ के सामने सुरक्षा मानक बौने साबित हो रहे हैं। क्षमता से अधिक लोगों का नाव पर सवार होना किसी बड़े हादसे को निमंत्रण दे रहा है।
3. मनमाना किराया और सुस्त तंत्र
स्थानीय लोगों की शिकायत है कि चोरी-छिपे अब भी मनमाना किराया वसूला जा रहा है। पुलिस बल की मौजूदगी के बावजूद घाटों पर अव्यवस्था का बोलबाला है।
जनता की पुकार: “हमे स्थायी समाधान चाहिए”
स्थानीय निवासी राजेश कुमार का कहना है, “नाव का सहारा लेना हमारी मजबूरी है, खुशी नहीं। यह व्यवस्था ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। जब तक पुल ठीक नहीं होता, हमारी जान जोखिम में बनी रहेगी।”
व्यापारियों का कहना है कि पुल बंद होने से माल ढुलाई ठप है, जिससे बाजार में आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बढ़ने लगी हैं।


