Patna News: बिहार के सुदूर और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने के संकल्प के साथ ग्रामीण कार्य विभाग ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना के तहत सीमांचल के चुनौतीपूर्ण जिलों में अब तक कुल 6,350 किलोमीटर लंबी पक्की सड़कों का निर्माण पूरा कर लिया गया है। यह विकास कार्य न केवल आवागमन को सुगम बना रहा है, बल्कि क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक तस्वीर को भी बदल रहा है।
अररिया जिले में हुआ सर्वाधिक निर्माण
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, सीमांचल के चार प्रमुख जिलों में सड़कों का व्यापक जाल बिछाया गया है:
- अररिया: यहाँ सबसे अधिक 2,155 किलोमीटर पक्की सड़कों का निर्माण हुआ है।
- पूर्णिया: 1,747 किलोमीटर सड़कों के साथ दूसरे स्थान पर है।
- कटिहार: जिले में 1,565 किलोमीटर लंबी ग्रामीण सड़कें बनकर तैयार हैं।
- किशनगंज: अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे इस संवेदनशील जिले में 883 किलोमीटर सड़कें बनाई गई हैं।
बाढ़ और जलजमाव की चुनौती का स्थायी समाधान
सीमांचल और पूर्वी बिहार का एक बड़ा हिस्सा हर साल बाढ़ और भारी बारिश के कारण जलमग्न रहता है। इन बारहमासी (all-weather) सड़कों और पुलों के निर्माण से सबसे बड़ा लाभ यह हुआ है कि अब आपदा की स्थिति में भी गांवों का संपर्क मुख्य शहरों से नहीं टूटता। इससे आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा और प्रशासनिक मदद समय पर ग्रामीणों तक पहुँच पा रही है।
किसानों की आय में वृद्धि और व्यापार को गति
सुदृढ़ सड़क संपर्कता का सीधा असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है। सीमांचल मखाना, जूट और अनानास की खेती के लिए प्रसिद्ध है। बेहतर सड़कों की वजह से किसान अब अपनी फसल को समय पर और कम लागत में बड़ी मंडियों तक पहुँचा पा रहे हैं। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि सुगम रास्तों की वजह से माल की ढुलाई आसान हुई है, जिससे व्यापार की लागत घटी और मुनाफा बढ़ा है।
सुदूर गांवों तक पहुँचा विकास
ग्रामीण कार्य विभाग का लक्ष्य केवल सड़क बनाना ही नहीं, बल्कि गाँव के अंतिम व्यक्ति तक विकास की पहुँच सुनिश्चित करना है। सीमांचल के ये चुनौतीपूर्ण क्षेत्र, जो कभी दुर्गमता के लिए जाने जाते थे, आज पक्की सड़कों के माध्यम से राज्य के प्रमुख आर्थिक केंद्रों से जुड़ चुके हैं।


