Bhagalpur News: राजनीति में जब अवसरवादिता और दल-बदल एक आम बात हो गई है, ऐसे समय में भागलपुर ने एक ऐसा नेता खो दिया है जिसकी रगों में कांग्रेस का खून दौड़ता था। प्रवीण सिंह कुशवाहा सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि भागलपुर कांग्रेस के एक ऐसे समर्पित योद्धा थे, जिन्होंने उतार-चढ़ाव के हर दौर में पार्टी का हाथ थामे रखा। आज कन्नौज के पास हुए एक दर्दनाक हादसे ने आज भागलपुर के इस चहेते नेता को हमसे हमेशा के लिए छीन लिया।
पार्टी के प्रति अटूट निष्ठा: कभी नहीं बदला पाला
प्रवीण सिंह कुशवाहा की सबसे बड़ी पहचान उनकी वैचारिक प्रतिबद्धता थी। भागलपुर की राजनीति को करीब से जानने वाले बताते हैं कि उन्होंने कभी भी सत्ता के लोभ में अपनी विचारधारा से समझौता नहीं किया। कई बार ऐसे मौके आए जब नेताओं ने पाला बदला, लेकिन प्रवीण जी “हाथ के निशान” के साथ चट्टान की तरह खड़े रहे। उनकी इसी वफादारी का सम्मान करते हुए हाल ही में कांग्रेस आलाकमान ने उन्हें भागलपुर जिला अध्यक्ष की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी थी।
कहलगांव की धरती से विधानसभा तक का सफर
प्रवीण सिंह कुशवाहा न केवल संगठन के व्यक्ति थे, बल्कि जनता के बीच भी उनकी गहरी पैठ थी। साल 2025 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने उन पर भरोसा जताते हुए कहलगांव विधानसभा सीट से अपना उम्मीदवार बनाया था। उस चुनाव में उन्होंने पूरे दमखम के साथ चुनाव लड़ा और कांग्रेस के झंडे को गांव-गांव तक पहुँचाया। हार-जीत से परे, उन्होंने कहलगांव की जनता के दिलों में अपनी एक अलग जगह बनाई थी।
एक वैक्यूम जो कभी नहीं भरेगा
एक तरफ जहाँ वे कार्यकर्ताओं के लिए ‘बड़े भाई’ की तरह थे, वहीं दूसरी ओर पार्टी नेतृत्व के लिए एक भरोसेमंद सलाहकार। उनके निधन से भागलपुर कांग्रेस में एक ऐसा शून्य (वैक्यूम) पैदा हो गया है, जिसे भरना निकट भविष्य में नामुमकिन लगता है। दिल्ली से पार्टी के काम निपटाकर लौटते वक्त हुए इस हादसे ने भागलपुर के राजनीतिक भविष्य को एक बड़ा जख्म दिया है।
“प्रवीण जी ने सिखाया कि राजनीति में पद से बड़ा कद होता है और कद आपकी निष्ठा से बनता है। भागलपुर का हर कांग्रेस कार्यकर्ता आज अनाथ महसूस कर रहा है।” — एक भावुक कांग्रेस कार्यकर्ता


