Crime News: भागलपुर पुलिस ने सुल्तानगंज नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी और सभापति पर हुए जानलेवा हमले के मामले में बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस और अपराधियों के बीच हुई मुठभेड़ (Encounter) में मुख्य आरोपी और कुख्यात अपराधी रामधनी यादव मारा गया है। इस कार्रवाई में पुलिस ने घटना में शामिल अन्य चार अपराधियों को भी दबोच लिया है।
क्या है पूरा मामला?
बीते 28 अप्रैल 2026 को सुल्तानगंज नगर परिषद कार्यालय में घुसकर अज्ञात हमलावरों ने कार्यपालक पदाधिकारी कृष्ण भूषण कुमार और सभापति राज कुमार गुड्डू को गोली मार दी थी। इस हमले में कृष्ण भूषण कुमार की मौत हो गई थी, जबकि सभापति गंभीर रूप से घायल हो गए थे। घटना की गंभीरता को देखते हुए वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP), भागलपुर के निर्देश पर विशेष टीमों का गठन किया गया था।
हथियार बरामदगी के दौरान पुलिस पर फायरिंग
पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर रामधनी यादव, दीपक यादव और पिंकू कुमार को गिरफ्तार किया था। पूछताछ के दौरान मुख्य आरोपी रामधनी यादव ने हथियार बरामद करवाने की बात स्वीकार की। जब पुलिस टीम उसे लेकर अगुवानी पुल के समीप निर्माणाधीन सड़क के पास बगीचे में पहुंची, तो वहां पहले से घात लगाए रामधनी के गुर्गों ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी।
जवाबी कार्रवाई और मौत
पुलिस टीम ने खुद को बचाते हुए जवाबी कार्रवाई (Self Defense) में गोलियां चलाईं। इस मुठभेड़ में रामधनी यादव को गोली लग गई और वह गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे तुरंत इलाज के लिए जेएलएनएमसीएसच (मायागंज) अस्पताल लाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस मुठभेड़ में तीन पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं, जिनका इलाज जारी है।
इन अपराधियों की हुई गिरफ्तारी
मुठभेड़ और सघन छापेमारी के बाद पुलिस ने रामधनी यादव के गिरोह के अन्य सदस्यों को गिरफ्तार किया है:
- दीपक यादव (सा०-श्यामबाग, सुल्तानगंज)
- पिंकू कुमार (सा०-करारी तीनटंगा, नवगछिया)
- सन्नी यादव (पुत्र-दिवंगत रामधनी यादव)
- मटुकी मंडल (सा०-नारायणपुर, सुल्तानगंज)
अपराधिक इतिहास: दहशत का दूसरा नाम था रामधनी
मृतक अपराधी रामधनी यादव का लंबा अपराधिक इतिहास रहा है। उस पर 1981 से लेकर 2026 तक हत्या, लूट, रंगदारी और आर्म्स एक्ट के 28 से अधिक संगीन मामले दर्ज थे। भागलपुर पुलिस की इस कार्रवाई से जिले के अपराधियों में हड़कंप मच गया है।


