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मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत का कड़ा रुख; उत्तर कोयल जलाशय योजना को मानसून से पहले रफ्तार देने का निर्देश

1367 करोड़ की महापरियोजना की समीक्षा: औरंगाबाद और गया में भू-अर्जन के लिए 30 अप्रैल की डेडलाइन तय

Patna News: बिहार की कृषि और सिंचाई व्यवस्था के लिए लाइफलाइन मानी जाने वाली उत्तर कोयल जलाशय योजना (North Koel Reservoir Project) को समय पर पूरा करने के लिए सरकार ने पूरी ताकत झोंक दी है। सोमवार को मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग (मुख्य सचिव कोषांग) में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में मुख्य सचिव  प्रत्यय अमृत ने परियोजना के अवशेष कार्यों की गहन समीक्षा की और अधिकारियों को ‘मिशन मोड’ में काम करने की चेतावनी दी।

प्रगति रिपोर्ट: 13 दिनों में दिखी तेजी, पर अभी लंबा सफर बाकी

​समीक्षा बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने परियोजना के वर्तमान आंकड़ों का विश्लेषण किया। बैठक में दी गई जानकारी के अनुसार:

  • कुल भौतिक प्रगति: पूरी परियोजना का अब तक 29.97% कार्य संपन्न हो चुका है।
  • राइट मेन कैनाल (RMC): इसका 55.04% कार्य पूरा हो गया है। विशेष रूप से पिछले 13 दिनों में 4.11% की तेज प्रगति दर्ज की गई है, जिसे मुख्य सचिव ने सकारात्मक तो बताया, लेकिन इसे और बढ़ाने के निर्देश दिए।
  • ग्राउंड जीरो पर संसाधन: वर्तमान में कार्यस्थल पर 571 कर्मी और भारी मशीनरी (एक्सकेवेटर, डम्पर, लाइनिंग पेवर) तैनात हैं।

भू-अर्जन पर ‘डेडलाइन’ का प्रहार

​परियोजना में सबसे बड़ी बाधा बन रहे भू-अर्जन के मामलों पर मुख्य सचिव ने सख्त रुख अख्तियार किया है। औरंगाबाद और गया जिलों के जिला प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं:

  1. औरंगाबाद: 41.251 हेक्टेयर भूमि के शेष हिस्से का अधिग्रहण हर हाल में 30 अप्रैल 2026 तक पूरा करना होगा।
  2. गया: यहाँ भी भू-अर्जन की प्रक्रिया को अंतिम चरण में पहुँचाकर जल्द से जल्द जमीन सौंपने का लक्ष्य रखा गया है।

मुख्य सचिव के 5 कड़े निर्देश: कार्य में लापरवाही की जगह नहीं

​”हमारा लक्ष्य कमांड एरिया के किसानों तक जल्द से जल्द पानी पहुँचाना है। इसमें किसी भी स्तर पर देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।” – प्रत्यय अमृत, मुख्य सचिव

 

  1. मानसून से पहले का लक्ष्य: मानसून की बारिश शुरू होने से पहले नहरों के अर्थ वर्क और लाइनिंग का अधिकतम कार्य पूरा कर लिया जाए।
  2. संसाधनों की बढ़ोतरी: जरूरत पड़ने पर मैनपावर और मशीनों की संख्या तुरंत बढ़ाई जाए ताकि शिफ्टों में काम चल सके।
  3. तकनीकी मूल्यांकन: वितरण प्रणाली (Distribution System) से जुड़ी निविदाओं (Tenders) का निपटारा तुरंत करने को कहा गया है।
  4. गुणवत्ता पर पहरा: निर्माण कार्य की क्वालिटी में कोई समझौता न हो, इसके लिए मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों को नियमित रूप से ‘साइट विजिट’ करने का आदेश दिया गया है।
  5. विशेष संरचनाओं पर ध्यान: KM 64.150 और KM 68.00 पर बन रहे गेट और होइस्ट सिस्टम के काम को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने को कहा गया है।

परियोजना का महत्व

1367.61 करोड़ रुपये की लागत वाली इस योजना के पूर्ण होने से औरंगाबाद और गया जिलों के हजारों हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि को सिंचाई की सुविधा मिलेगी। यह न केवल सूखे की समस्या को समाप्त करेगी बल्कि बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी।

विजय सिन्हा
विजय सिन्हाhttp://silktvnews.com
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