Patna News: बिहार की बहुप्रतीक्षित और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सुल्तानगंज-अगुवानी घाट महासेतु परियोजना को लेकर राज्य सरकार ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। सोमवार को मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने इस 2×2 लेन पुल और इसके पहुँच पथ (Approach Road) के निर्माण कार्यों की बिंदुवार समीक्षा की। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि मई 2026 की समय-सीमा पत्थर की लकीर है और इसमें किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पसराहा ROB और इंटरचेंज: बाधाएं हुईं दूर
समीक्षा बैठक के दौरान परियोजना की तकनीकी बाधाओं को सुलझाने पर सकारात्मक चर्चा हुई:
- डिजाइन को हरी झंडी: पसराहा रेलवे ओवर ब्रिज (ROB) के लिए CSIR से डिजाइन और ड्राइंग का अनुमोदन 10 अप्रैल 2026 को प्राप्त हो चुका है, जिससे निर्माण का रास्ता साफ हो गया है।
- पसराहा इंटरचेंज: इसके पुनरीक्षित प्रस्ताव पर NOC के लिए बेगूसराय पीआईयू (PIU) के साथ बेहतर तालमेल बिठाकर मामलों को जल्द सुलझाने का निर्देश दिया गया है।
सेफ्टी ऑडिट में देरी पर ‘रेड सिग्नल’
मुख्य सचिव ने सुरक्षा मानकों को लेकर संवेदक (ठेकेदार) को सख्त चेतावनी दी। EDB-3 (P13 से P16) के लिए लंबित ‘सेफ्टी ऑडिट’ और ‘इंटीग्रिटी टेस्ट रिपोर्ट’ अभी तक जमा नहीं करने पर उन्होंने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने आदेश दिया कि पुल की सुरक्षा से जुड़ी ये रिपोर्ट्स अविलंब सौंपी जाएं ताकि गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके।
मुख्य सचिव के 4 ‘सुपर निर्देश’:
- संसाधनों में भारी वृद्धि: मई 2026 तक एप्रोच रोड का काम खत्म करने के लिए साइट पर मशीनरी और श्रमिकों (Manpower) की संख्या तुरंत बढ़ाने का हुक्म दिया गया है।
- टाइमलाइन का कड़ाई से पालन: मुख्य सचिव ने कहा कि पहुँच पथ के बिना पुल की उपयोगिता अधूरी है, इसलिए इसे प्राथमिकता पर रखा जाए।
- प्रशासनिक समन्वय: रेलवे और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर उन बाधाओं को दूर किया जाए जिनकी वजह से काम रुक सकता है।
- जीरो टॉलरेंस ऑन क्वालिटी: गति बढ़ाने के चक्कर में निर्माण की गुणवत्ता और संरचनात्मक सुरक्षा (Structural Safety) के साथ कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
क्यों अहम है यह पुल?
भागलपुर के सुल्तानगंज और खगड़िया के अगुवानी घाट को जोड़ने वाला यह महासेतु न केवल उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच की दूरी को कम करेगा, बल्कि विश्वप्रसिद्ध श्रावणी मेले के दौरान कांवरियों और स्थानीय व्यापारियों के लिए वरदान साबित होगा। 1700 करोड़ से अधिक की लागत वाली इस परियोजना पर पूरे बिहार की नजरें टिकी हैं।


