Patna News: बिहार के कृषि क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए अब विभाग के अधिकारी केवल दफ्तरों की फाइलों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि शारीरिक और मानसिक रूप से भी ‘सुपर फिट’ नजर आएंगे। बिहार कृषि विभाग के 150 वरिष्ठ पदाधिकारियों का सात दिवसीय विशेष साहसिक प्रशिक्षण (Adventure Training) उत्तराखंड के उत्तरकाशी स्थित प्रतिष्ठित नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (NIM) में सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है।
क्यों खास था यह प्रशिक्षण?
08 अप्रैल से 14 अप्रैल तक चले इस कठिन प्रशिक्षण शिविर में विभाग के विभिन्न स्तर के अधिकारियों ने हिस्सा लिया, जिनमें प्रमुख हैं:
- सहायक निदेशक
- उप निदेशक
- उप सचिव
- जिला कृषि पदाधिकारी
इस शिविर का मुख्य उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि अधिकारियों के भीतर नेतृत्व क्षमता (Leadership), टीम वर्क और प्रतिकूल परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता का विकास करना था।
‘फिट ऑफिसर, हिट खेती’: प्रधान सचिव का संबोधन
समापन समारोह में पहुंचे कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल ने प्रशिक्षण पूरा करने वाले अधिकारियों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने अपने संबोधन में कुछ महत्वपूर्ण बातें कहीं:
”प्रशासनिक दक्षता के लिए केवल बौद्धिक क्षमता काफी नहीं है, अधिकारियों का शारीरिक और मानसिक रूप से फिट होना भी अनिवार्य है। उत्तरकाशी की पहाड़ियों पर मिली यह चुनौती हमारे अफसरों में वह आत्मविश्वास भरेगी, जिससे वे बिहार के किसानों की समस्याओं का समाधान और सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन और अधिक प्रभावी ढंग से कर सकेंगे।”
प्रशिक्षण के मुख्य आकर्षण और लाभ
विशेषज्ञों की देखरेख में आयोजित इस कार्यक्रम से अधिकारियों की कार्यशैली में बड़े बदलाव की उम्मीद है:
मुख्य बिंदु | लाभ एवं प्रभाव |
|---|---|
मानसिक मजबूती | कठिन परिस्थितियों में तनाव मुक्त रहकर काम करने का कौशल। |
टीम बिल्डिंग | आपसी समन्वय से विभागीय लक्ष्यों को समय पर पूरा करना। |
शारीरिक क्षमता | क्षेत्र भ्रमण और जमीनी स्तर पर कार्यों की निगरानी में तेजी। |
नेतृत्व विकास | संकट के समय सटीक और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता। |
नई ऊर्जा के साथ मैदान में वापसी
नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (NIM) के विशेषज्ञों से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद, सभी 150 पदाधिकारी अब अपनी-अपनी जिम्मेदारियों पर लौट रहे हैं। विभाग का मानना है कि इस ‘साहसिक अनुभव’ के बाद अधिकारी अब दफ्तरों में अधिक सकारात्मक ऊर्जा के साथ काम करेंगे।
बिहार सरकार की इस अनूठी पहल का लक्ष्य कृषि विभाग के प्रशासनिक ढांचे को आधुनिक, सक्रिय और परिणामोन्मुखी बनाना है, ताकि अंतिम पायदान पर खड़े किसान को इसका सीधा लाभ मिल सके।


