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भागलपुर की पहचान बनी बिशहरी पूजा, राजकीय मेला घोषित करने की उठी मांग

बिहार के भागलपुर जिले में इन दिनों श्रद्धा और आस्था का सबसे बड़ा लोकपर्व बिशहरी पूजा धूमधाम से मनाई जा रही है। इसे विषहरी पूजा या बिहुला-विषहरी पूजा भी कहा जाता है। यह महापर्व नागों की देवी मां मनसा को समर्पित है, जिन्हें लोक परंपरा में सांपों की देवी के रूप में पूजा जाता है। आस्था और संस्कृति का अद्भुत संगम यह पर्व अब भागलपुर की पहचान बन चुका है।

लोककथा बिहुला-बाला से जुड़ी अमर गाथा

इस पूजा का आधार अंग प्रदेश की प्राचीन लोककथा बिहुला-बाला है। मान्यता है कि देवी मनसा की पूजा करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और विशेषकर सर्पदंश से रक्षा होती है। कथा के अनुसार, बिहुला ने अपने पति लखिंदर बाला को जीवनदान दिलाने के लिए देवी मनसा से संघर्ष किया था। यह गाथा नारी शक्ति, साहस और अटूट संकल्प का प्रतीक मानी जाती है। यही वजह है कि यह पर्व सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज में नारी सशक्तिकरण और लोक परंपरा की गहरी जड़ें भी दर्शाता है।

उत्सव का भव्य स्वरूप

पूरे भागलपुर और आसपास के क्षेत्रों में इन दिनों भक्तिमय माहौल देखने को मिल रहा है। जगह-जगह लोकगीत, पारंपरिक नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आयोजन किया जा रहा है। बड़े-बड़े मेले सज रहे हैं, जिनमें दूर-दराज़ से श्रद्धालु, कलाकार और व्यापारी शामिल हो रहे हैं। इस मौके पर सर्पदेवी मनसा की पूजा के साथ-साथ बिहुला की अमर कथा का मंचन किया जाता है, जिससे लोककला और संस्कृति को नया जीवन मिलता है।

राजकीय मेला घोषित करने की उठी मांग

स्थानीय लोग और सांस्कृतिक संगठन अब सरकार से यह मांग कर रहे हैं कि बिशहरी पूजा को राजकीय मेला का दर्जा दिया जाए। उनका कहना है कि यह पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि अंग प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर और लोकपरंपरा का भी अभिन्न हिस्सा है। अगर इसे राजकीय मेला घोषित किया जाता है तो यह आयोजन और भी भव्य स्वरूप में सामने आएगा तथा आने वाली पीढ़ियों तक इसे संरक्षित किया जा सकेगा।

बाइट

राजीव लाल, अध्यक्ष, मनसा मंदिर
“बिशहरी पूजा भागलपुर की आस्था और पहचान है। सरकार अगर इसे राजकीय मेला घोषित करे तो यह पूरे बिहार ही नहीं, बल्कि देश में भी सांस्कृतिक धरोहर के रूप में नई पहचान बना सकेगा।”

निस्संदेह, बिशहरी पूजा आस्था, लोकगीत और संस्कृति का अनूठा संगम है। अब देखना यह होगा कि क्या सरकार इसे राजकीय दर्जा देकर इस लोकपरंपरा को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में कदम बढ़ाती है।

विजय सिन्हा
विजय सिन्हाhttp://silktvnews.com
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