Patna News: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार की कमान संभालते ही प्रशासनिक और पुलिस महकमे में नई ऊर्जा और सख्ती का संचार कर दिया है। पटना के अधिवेशन भवन में प्रदेश भर के सभी डीएम (DM) और एसपी (SP) के साथ अपनी पहली उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया कि बिहार अब ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर चलेगा। उन्होंने स्पष्ट लहजे में अधिकारियों को चेतावनी दी कि अब बीच का रास्ता अपनाने का समय खत्म हो चुका है।
पुलिस कप्तानों को निर्देश: “अपराध हुआ तो रिजल्ट चाहिए”
मुख्यमंत्री ने कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर जिलों के एसपी को दो टूक शब्दों में निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अपराधियों के मन में कानून का खौफ होना चाहिए, न कि आम जनता के मन में।
- सख्त कार्रवाई: अपराधियों को उनकी सही जगह दिखाएं ताकि किसी भी गड़बड़ी फैलाने वाले का मंसूबा कामयाब न हो।
- जवाबदेही तय: सीएम ने कहा कि यदि कहीं भी कोई बड़ी वारदात होती है, तो पुलिस को तुरंत परिणाम (Result) देना होगा। अब फाइलों में जांच के नाम पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
- बेटियों की सुरक्षा सर्वोपरि: बच्चियों के साथ जघन्य अपराध करने वालों के खिलाफ मुख्यमंत्री ने सबसे सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि ऐसे अपराधियों के खिलाफ त्वरित न्याय सुनिश्चित किया जाए।
जिलाधिकारियों को हिदायत: “फाइलों में नहीं, ग्राउंड जीरो पर होगी समीक्षा”
प्रशासनिक सुधारों को लेकर मुख्यमंत्री ने डीएम को विकास योजनाओं की रफ्तार बढ़ाने का आदेश दिया।
- समय पर पूरा हो काम: विकास की योजनाओं में किसी भी तरह की कोताही या देरी अब अधिकारियों पर भारी पड़ेगी।
- नया वर्किंग मॉडल: सीएम ने एक बड़ा क्रांतिकारी बदलाव करते हुए कहा कि अब समीक्षा बैठकें एसी कमरों में नहीं होंगी। सरकार अब सीधे ‘ग्राउंड जीरो’ पर पहुंचेगी, जहां काम चल रहा है। वहीं पर योजनाओं की प्रगति की जांच होगी और अधिकारियों से बात की जाएगी।
75 फीसदी समस्याओं का ‘मास्टर फार्मूला’
बैठक के दौरान सम्राट चौधरी ने एक बड़ा मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि अगर जिले के DM और SP सही सोच और समन्वय (Coordination) के साथ काम करें, तो जिले की 75 फीसदी समस्याएं बिना किसी अतिरिक्त प्रयास के खुद-ब-खुद हल हो जाएंगी। उन्होंने अधिकारियों को जनता के प्रति संवेदनशील और अपराधियों के प्रति कठोर बनने की सलाह दी।
बिहार में अब ‘सम्राट मॉडल’ लागू
यह बैठक महज एक समीक्षा नहीं, बल्कि बिहार के प्रशासनिक ढांचे के लिए एक ‘वेक-अप कॉल’ थी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी सरकार का लक्ष्य केवल कुर्सी संभालना नहीं, बल्कि व्यवस्था परिवर्तन है। अब देखना यह है कि राजधानी से मिला यह कड़ा संदेश जिलों के धरातल पर कितनी जल्दी असर दिखाता है।


