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बिहार म्यूजियम के नाम एक और बड़ी उपलब्धि: देश की नंबर-1 ‘म्यूजियम शॉप’ बनी, करोड़ों में हुई कमाई

म्यूजियम सोविनियर शॉप ने बनाया नेशनल रिकॉर्ड; एक साल में 1.71 करोड़ रुपये का हुआ ऐतिहासिक कारोबार

Patna News: बिहार की राजधानी पटना स्थित बिहार म्यूजियम ने कला और संस्कृति के साथ-साथ अब आर्थिक मोर्चे पर भी देश में अपना परचम लहराया है। बिहार म्यूजियम की ‘सोविनियर शॉप’ (Souvenir Shop) भारत की सबसे अधिक बिक्री करने वाली संग्रहालय दुकान बन गई है। पिछले एक साल के आंकड़ों ने यह साबित कर दिया है कि बिहार की पारंपरिक कला और शिल्प का जादू न केवल देसी बल्कि विदेशी पर्यटकों के सिर चढ़कर बोल रहा है।

कमाई के आंकड़े: साल दर साल जबरदस्त उछाल

​बिहार म्यूजियम की दुकान ने राजस्व प्राप्ति के मामले में पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं:

  • वित्तीय वर्ष 2025-26: कुल 1 करोड़ 71 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ।
  • वित्तीय वर्ष 2024-25: 1 करोड़ 34 लाख रुपये का कारोबार हुआ था।
  • वृद्धि: पिछले वर्ष की तुलना में राजस्व में लगभग 27% की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

क्या है पर्यटकों की पहली पसंद?

​म्यूजियम शॉप में मिलने वाले उत्पादों में परंपरा और आधुनिकता का बेजोड़ संगम है। यहाँ उपलब्ध सामानों को तीन प्रमुख श्रेणियों में बांटा जा सकता है:

1. कला और हस्तशिल्प (Art & Craft)

  • मधुबनी और मिथिला पेंटिंग: इन कलाकृतियों से सजे उत्पाद पर्यटकों के बीच आकर्षण का केंद्र हैं।
  • सिक्कि कला: सिक्की से बने ईयररिंग्स और डेकोरेटिव आइटम्स।
  • जूट बैग्स: पर्यावरण के अनुकूल और स्टाइलिश जूट बैग।

2. परिधान और फैशन (Apparel)

  • भागलपुरी सिल्क और खादी: ‘वोकल फॉर लोकल’ को बढ़ावा देते हुए यहाँ भागलपुरी सिल्क और बावन बूटी खादी कॉटन की साड़ियां उपलब्ध हैं।
  • खासियत: नालंदा की हस्तनिर्मित साड़ियाँ, जो पूरी तरह हैंडलूम तकनीक से बनी हैं।
  • कीमत: महिलाओं के लिए कॉटन कुर्तियां और साड़ियाँ 700 रुपये से लेकर 7,000 रुपये तक की रेंज में उपलब्ध हैं।

3. डेली यूज और गिफ्ट आइटम्स

  • ​आकर्षक डिजाइन वाले की-रिंग, की-चेन, पेन और डायरी।
  • ​युवाओं के लिए लैपटॉप बैग और स्टाइलिश ‘मोदी कोट’।
  • ​घर की सजावट के लिए शो-पीस और वॉल हैंगिंग्स।

स्थानीय कारीगरों और कैदियों को मिल रहा संबल

​इस शॉप की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह केवल एक व्यापारिक केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक सशक्तिकरण का जरिया भी है।

​”यहाँ न केवल स्थानीय कारीगरों के हुनर को मंच मिल रहा है, बल्कि राज्य की जेलों में बंद कैदियों द्वारा बनाए गए उत्पादों को भी बिक्री के लिए रखा गया है। इससे कारीगरों को आर्थिक मजबूती मिल रही है।” — अशोक कुमार सिन्हा, अपर निदेशक, बिहार म्यूजियम

 

भविष्य की योजना: अंतरराष्ट्रीय पहचान पर नजर

​बिहार म्यूजियम प्रबंधन अब इस सफलता को अगले स्तर पर ले जाने की तैयारी में है। आने वाले समय में यहाँ कई और नए उत्पादों को जोड़ा जाएगा। लक्ष्य साफ है—बिहार की समृद्ध संस्कृति, कला और शिल्प को नेशनल और इंटरनेशनल मार्केट में एक मजबूत ब्रांड के रूप में स्थापित करना।

​अगर आप भी बिहार की विरासत को अपने साथ ले जाना चाहते हैं, तो अगली बार बिहार म्यूजियम की यात्रा पर इस सोविनियर शॉप को एक्सप्लोर करना न भूलें!

विजय सिन्हा
विजय सिन्हाhttp://silktvnews.com
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