Patna News: बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी योजना प्राक् परीक्षा प्रशिक्षण केंद्र अनुसूचित जाति (SC) एवं अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के मेधावी छात्र-छात्राओं के लिए वरदान साबित हो रही है। आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन मेधावी छात्रों को यूपीएससी और बीपीएससी जैसी कठिन परीक्षाओं के लिए तैयार करने के मकसद से शुरू की गई इस पहल के शानदार परिणाम सामने आ रहे हैं।
सफलता का साल: 2025 में 91 विद्यार्थियों का चयन
राज्य सरकार के प्रयासों का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। वर्ष 2025 के आंकड़ों के अनुसार, इन केंद्रों से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले 91 विद्यार्थियों ने विभिन्न सरकारी परीक्षाओं में सफलता का परचम लहराया है। सफल अभ्यर्थियों ने मुख्य रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों में अपनी जगह बनाई है:
- शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE)
- स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (SSC)
- रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB)
- बिहार पुलिस सेवा
राज्य के 10 जिलों में चल रहे हैं केंद्र
एससी-एसटी कल्याण विभाग द्वारा राज्य के प्रमुख विश्वविद्यालयों के समन्वय से कुल 10 प्राक्-परीक्षा प्रशिक्षण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों पर वर्तमान में लगभग 2400 अभ्यर्थियों को निशुल्क प्रशिक्षण और मार्गदर्शन दिया जा रहा है।
केंद्रों की सूची:
ये केंद्र पटना, भागलपुर, गया, आरा (भोजपुर), सारण (छपरा), मुजफ्फरपुर, सहरसा, पूर्णिया, मुंगेर और दरभंगा जिलों में स्थित हैं।
प्रबंधन क्षेत्र के लिए ‘स्टूडेंट गाइडेंस सेंटर’
प्रतियोगी परीक्षाओं के अलावा, प्रबंधन (Management) के क्षेत्र में करियर बनाने वाले छात्रों के लिए पटना स्थित चंद्रगुप्त प्रबंधन संस्थान में ‘स्टूडेंट गाइडेंस सेंटर’ चलाया जा रहा है। यहाँ प्रति वर्ष 60 छात्रों को विशेष रूप से GMAT/CAT जैसी कठिन प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कराई जाती है।
कौन ले सकता है लाभ? (पात्रता शर्तें)
इस योजना का लाभ उठाने के लिए सरकार ने कुछ अनिवार्य शर्तें रखी हैं:
- अभ्यर्थी को बिहार का स्थाई निवासी होना आवश्यक है।
- अभ्यर्थी अनुसूचित जाति (SC) या अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग से होना चाहिए।
- परिवार की कुल वार्षिक आय 3 लाख रुपये से कम होनी चाहिए।


