Patna News: बिहार में गन्ना किसानों के अच्छे दिन आने वाले हैं। राज्य सरकार ने सूबे में चीनी उद्योग को पुनर्जीवित करने के लिए अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। गन्ना उद्योग विभाग ने उन 25 जिलाधिकारियों को कड़ा रिमाइंडर भेजा है, जिन्होंने अब तक नई चीनी मिलों की स्थापना के लिए भूमि चयन का प्रस्ताव विभाग को उपलब्ध नहीं कराया है।
सात निश्चय-3: रोजगार और औद्योगिकीकरण पर जोर
राज्य सरकार ने अपने महत्वाकांक्षी ‘सात निश्चय-3’ कार्यक्रम के तहत बिहार की बंद पड़ी चीनी मिलों को पुनः चालू करने और 25 नई अत्याधुनिक चीनी मिलें स्थापित करने का बड़ा निर्णय लिया है। इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है, जो सीधे तौर पर प्रोजेक्ट की निगरानी कर रही है।
100 एकड़ भूमि की तलाश: कहाँ फंसा है पेंच?
सरकार के निर्देशों के मुताबिक, प्रत्येक नई चीनी मिल की स्थापना के लिए कम से कम 100 एकड़ एकमुश्त भूमि की आवश्यकता है। विभाग के ताजा अपडेट के अनुसार:
- सकारात्मक प्रगति: कुछ जिलों ने सफलतापूर्वक भूमि चिन्हित कर ली है और उनका प्रस्ताव गन्ना उद्योग विभाग को मिल चुका है।
- देरी पर सख्ती: जिन जिलों से अब तक प्रस्ताव नहीं आया है, वहां विभाग ने पत्र भेजकर ‘शीघ्र प्रस्ताव’ उपलब्ध कराने का अल्टीमेटम दिया है। विभाग चाहता है कि मानसून के बाद निर्माण संबंधी प्राथमिक प्रक्रियाओं को गति दी जा सके।
किसानों को मिलेगा सीधा लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि इन चीनी मिलों के चालू होने से न केवल गन्ना उत्पादक किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य और बाजार मिलेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर हजारों युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार भी प्राप्त होगा। यह कदम बिहार को एथेनॉल और चीनी उत्पादन के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।


