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BAU में विश्व बौद्धिक संपदा दिवस 2026: कृषि नवाचार को ‘IPR’ के कवच से सशक्त बनाने का महामंथन

नवाचार से समृद्धि की ओर बढ़ते कदम; बीएयू ने रचा इतिहास, अब तक हासिल किए 23 पेटेंट और 5 GI टैग।

Bhagalpur News: बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU), सबौर ने आज ‘विश्व बौद्धिक संपदा दिवस’ (World Intellectual Property Day) के अवसर पर कृषि क्षेत्र में नवाचार, तकनीक और कानूनी सुरक्षा को लेकर एक उच्चस्तरीय विचार-विमर्श सत्र का आयोजन किया। विश्वविद्यालय के निदेशालय अनुसंधान (DoR) में आयोजित इस मंथन का उद्देश्य प्रयोगशाला में होने वाले शोध को बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPR) के जरिए बाजार और किसान के खेतों तक मजबूती से पहुँचाना है।

प्रमुख आकर्षण: कृषि और खेल के नवाचारों का अनूठा संगम

​इस वर्ष World Intellectual Property Organization (WIPO) द्वारा निर्धारित थीम “IP and Sports: Ready, Set, Innovate” पर चर्चा करते हुए विशेषज्ञों ने एक दिलचस्प तुलना पेश की। जिस तरह खेलों में सटीकता और नई तकनीक खिलाड़ी के प्रदर्शन को निखारती है, ठीक उसी तरह कृषि में ‘नवाचार’ उत्पादकता की नई ऊंचाइयां छूने में मदद करता है।

निदेशक अनुसंधान, डॉ. ए.के. सिंह ने सत्र की अध्यक्षता करते हुए कहा:

“IPR केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह हमारे वैज्ञानिकों की मेहनत को स्वामित्व और मूल्य प्रदान करने का जरिया है। भविष्य का अनुसंधान केवल ‘पेपर’ (Paper) तक सीमित न रहे, बल्कि ‘पेटेंट’ (Patent) बनकर किसानों की आय बढ़ाए, यही हमारा लक्ष्य है।”

 

बीएयू की उपलब्धियों का ‘रिपोर्ट कार्ड’: नवाचार का पावरहाउस

​सत्र के दौरान विश्वविद्यालय की अब तक की शानदार यात्रा का विवरण साझा किया गया। BAU ने बौद्धिक संपदा के क्षेत्र में अपनी धाक जमाते हुए निम्नलिखित उपलब्धियां दर्ज की हैं:

श्रेणी

संख्या

पेटेंट (Patents)

23

कॉपीराइट (Copyrights)

24

भौगोलिक संकेतक (GI Tags)

05

ट्रेडमार्क (Trademark)

01

विशेषज्ञों ने जोर दिया कि आविष्कार प्रकटीकरण (Invention Disclosure) से लेकर लाइसेंसिंग और स्टार्टअप प्रोत्साहन तक की पूरी कड़ी को और अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा रहा है।

कुलपति का संदेश: “नवाचार को आर्थिक लाभ में बदलना अनिवार्य”

​विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह ने अपने संदेश में वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को प्रेरित करते हुए कहा कि एक मजबूत IPR इकोसिस्टम ही कृषि उद्यमिता (Agri-entrepreneurship) की नींव है। उन्होंने Technology Readiness Levels (TRL) और उद्योगों के साथ तालमेल बिठाने पर विशेष जोर दिया ताकि तकनीकी हस्तांतरण (Technology Transfer) की प्रक्रिया तेज हो सके।

मंथन के मुख्य बिंदु: छोटे किसानों तक पहुंचेगा लाभ

​सत्र में शामिल महाविद्यालयों के प्राचार्यों और वैज्ञानिकों ने सर्वसम्मति से कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं को रेखांकित किया:

  • GI आधारित ब्रांडिंग: बिहार के विशिष्ट उत्पादों को GI टैग के माध्यम से वैश्विक पहचान दिलाना।
  • बाजार उन्मुख अनुसंधान: शोध ऐसा हो जिसकी बाजार में मांग हो और जो उद्योगों को आकर्षित करे।
  • समावेशी नवाचार: यह सुनिश्चित करना कि IPR का लाभ केवल बड़े संस्थानों तक न रहे, बल्कि छोटे और वंचित किसानों को भी इसका आर्थिक लाभ मिले।

कार्यक्रम का समापन

​कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. मनकेश कुमार ने किया और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. चंदा कुशवाहा द्वारा प्रस्तुत किया गया। सत्र का समापन इस सामूहिक संकल्प के साथ हुआ कि बिहार कृषि विश्वविद्यालय को ‘IPR संचालित कृषि नवाचार’ का एक ऐसा केंद्र बनाया जाएगा, जहां हर नया विचार सुरक्षित होगा और हर नवाचार किसानों के लिए समृद्धि का द्वार खोलेगा।

विजय सिन्हा
विजय सिन्हाhttp://silktvnews.com
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