Bhagalpur News: बिहार प्रशासनिक सेवा के चमकते सितारे और सुल्तानगंज नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी (EO) स्व. कृष्ण भूषण कुमार अब हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन उनकी वीरता और ईमानदारी की कहानी बिहार के प्रशासनिक इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गई है। बुधवार को मधुबनी के गदियानी लोहरसारी में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
संघर्षों से तपकर निखरा था व्यक्तित्व
कृष्ण भूषण कुमार का जीवन संघर्ष और सफलता की एक प्रेरणादायक मिसाल है। मूल रूप से मधुबनी के रहने वाले कृष्ण भूषण ने बहुत कम उम्र में ही अपने माता-पिता (पिता स्व. रामचंद्र साह और माता स्व. सीमा देवी) को खो दिया था। अनाथ होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी मेधा के दम पर 2018 में UGC NET जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा उत्तीर्ण की। उनके भाई बताते हैं कि वे हमेशा से समाज के लिए कुछ बड़ा करना चाहते थे।
सेवा और साहस का संगम
उन्होंने 28 फरवरी 2025 को कहलगांव में कार्यपालक पदाधिकारी के रूप में अपना प्रशासनिक सफर शुरू किया था। उनकी कार्यकुशलता को देखते हुए उन्हें सुल्तानगंज का अतिरिक्त प्रभार मिला।
- शहादत की रात: 28 अप्रैल को जब अपराधियों ने दफ्तर पर हमला किया, तो कृष्ण भूषण कुमार ने भागने के बजाय अपराधियों को पकड़ने का साहस दिखाया।
- सर्वोच्च बलिदान: इसी संघर्ष में अपराधियों ने उन्हें गोली मार दी। उन्होंने अपने कर्तव्य की वेदी पर अपनी जान न्यौछावर कर दी।
राजकीय सम्मान: गार्ड ऑफ ऑवर और अंतिम विदाई
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश पर प्रशासन ने शहीद अधिकारी को वह सम्मान दिया जिसके वे हकदार थे।
- अंतिम विदाई: जिलाधिकारी आनंद शर्मा और एसपी योगेंद्र कुमार ने पार्थिव शरीर पर श्रद्धासुमन अर्पित किए।
- सलामी: बिहार पुलिस के जवानों ने शस्त्र झुकाकर उन्हें ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया।
- 25 लाख की सहायता: मौके पर ही जिलाधिकारी ने उनकी पत्नी शालू कुमारी को 25 लाख रुपये का चेक सौंपा और बच्चों (3 साल का बेटा और 1 साल की बेटी) के भविष्य के लिए हर संभव मदद का भरोसा दिया।
प्रशासनिक हलके में शोक और संकल्प
शोक सभा में नगर विकास विभाग के विशेष सचिव मनन राम और कई अन्य वरीय अधिकारी शामिल हुए। सभी ने एक स्वर में कहा कि कृष्ण भूषण कुमार की शहादत बेकार नहीं जाएगी। अपराधियों को उनके किए की सजा जरूर मिलेगी।


