Bhagalpur News: आज सिल्क सिटी भागलपुर पूरी तरह से देशभक्ति के रंग में सराबोर नजर आई। अवसर था 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के महान योद्धा और अदम्य साहस के प्रतीक बाबू वीर कुंवर सिंह के विजयोत्सव का। शहर के कोने-कोने से आए लोगों ने उस वीर सपूत को याद किया, जिसने 80 वर्ष की उम्र में अपनी तलवार की धार से ब्रिटिश हुकूमत की चूलें हिला दी थीं।
प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुआ समारोह का आगाज
विजयोत्सव की शुरुआत जीरो माइल चौक पर स्थित बाबू वीर कुंवर सिंह की भव्य आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुई। यहाँ स्थानीय नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों ने श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस दौरान वक्ताओं ने उनके जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कुंवर सिंह केवल एक योद्धा नहीं, बल्कि अन्याय के विरुद्ध एक जलती हुई मशाल थे।
गगनभेदी नारों के साथ निकली भव्य शोभा यात्रा
समारोह का मुख्य आकर्षण जीरो माइल से आदमपुर टाउन हॉल तक निकाली गई विशाल शोभा यात्रा रही।
- शौर्य का प्रदर्शन: हाथों में झंडे और जुबां पर देशभक्ति के तराने लिए हजारों की संख्या में युवा और बुजुर्ग इस यात्रा का हिस्सा बने।
- गूंज उठा शहर: ‘बाबू वीर कुंवर सिंह अमर रहें’ और ‘जय भवानी’ के गगनभेदी नारों से पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा।
- ऐतिहासिक मार्ग: यह यात्रा शहर के प्रमुख चौराहों से होते हुए गुजरी, जहाँ जगह-जगह लोगों ने पुष्प वर्षा कर वीर कुंवर सिंह के शौर्य को नमन किया।
अदम्य साहस की मिसाल: जब काटा था अपना ही हाथ
कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने बाबू वीर कुंवर सिंह के उस ऐतिहासिक प्रसंग को भी याद किया, जब गंगा पार करते समय अंग्रेजों की गोली लगने पर उन्होंने अपना हाथ काटकर मां गंगा को अर्पित कर दिया था। 80 वर्ष की आयु में भी उनकी युद्ध कला और छापामार रणनीति ने अंग्रेजों को नाकों चने चबवा दिए थे।
“बाबू वीर कुंवर सिंह का बलिदान और उनका शौर्य आज की युवा पीढ़ी के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा है। उन्होंने सिखाया कि राष्ट्र की रक्षा के लिए उम्र का कोई बंधन नहीं होता।”
— समारोह में उपस्थित गणमान्य वक्ता
भावी पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत
आदमपुर टाउन हॉल में आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि ऐसे वीर पुरुषों के इतिहास को पाठ्यक्रमों और जन-जन तक पहुँचाना अनिवार्य है। आज के इस उत्सव ने यह साबित कर दिया कि भागलपुर की मिट्टी में आज भी देशभक्ति और स्वाभिमान का जज्बा कायम है।
भागलपुर में मनाया गया यह विजयोत्सव केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि इतिहास के उस महान अध्याय का सम्मान है, जिसने भारत की आजादी की नींव रखी थी। शहर का हर नागरिक आज गर्व से भरा हुआ महसूस कर रहा था।


