Bhagalpur News: बिहार के सुल्तानगंज में नगर परिषद कार्यालय के भीतर घुसकर तांडव मचाने वाले मुख्य आरोपी रामधनी यादव का अंत पुलिस की गोलियों से हो गया। लेकिन सुल्तानगंज के इस ‘डॉन’ के एनकाउंटर के साथ ही अपराध के उस अध्याय का भी अंत हो गया, जिसने पिछले एक दशक से इलाके में खौफ पैदा कर रखा था।
शुरुआत: लाठी लेकर गाय चराने वाला ‘चरवाहा’
रामधनी यादव का अतीत किसी सामान्य ग्रामीण जैसा ही था। स्थानीय लोगों के अनुसार, वह कभी सुल्तानगंज के दीघा और आसपास के बहियार (मैदानों) में गायों और भैंसों को चराने (चरवाहा) का काम करता था। हाथ में लाठी और कंधे पर गमछा रखने वाला रामधनी तब तक सिर्फ अपनी मेहनत के लिए जाना जाता था।
अपराध की दुनिया में पहला कदम
रामधनी की महत्वाकांक्षा उसे खेतों से निकालकर ठेकेदारी और दबंगई की ओर ले आई। बताया जाता है कि शुरुआत में वह छोटे-मोटे झगड़ों और जमीन के विवादों में पंचायती करने लगा। धीरे-धीरे उसने हथियार थाम लिए और दियारा क्षेत्र के अपराधियों के साथ उसका उठना-बैठना शुरू हो गया। देखते ही देखते, चरवाहा रहने वाला रामधनी सुल्तानगंज के अपराध जगत का एक जाना-पहचाना नाम बन गया।
टेंडर और वर्चस्व की जंग
रामधनी यादव की असली ताकत तब बढ़ी जब उसने सरकारी टेंडरों में दखल देना शुरू किया।
- पार्किंग और घाट की बंदोबस्ती: सुल्तानगंज में पार्किंग और नमामि गंगे घाट के टेंडरों पर कब्जे को लेकर उसका विवाद कई बार प्रशासनिक अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों से हुआ।
- जमीन कब्जा: आरोप है कि उसने बहियार और शहरी इलाकों में कई विवादित जमीनों पर जबरन कब्जा किया।
- नगर परिषद में दखल: वह नगर परिषद के कामों में अपनी मनमर्जी चलाना चाहता था। जब सभापति राजकुमार गुड्डू और EO कृष्ण भूषण कुमार ने उसके रसूख के आगे झुकने से इनकार कर दिया, तो उसने इस खूनी साजिश को अंजाम दिया।
वह काला दिन: 28 अप्रैल 2026
मंगलवार की दोपहर रामधनी ने अपने गुर्गों के साथ नगर परिषद कार्यालय में घुसकर अंधाधुंध फायरिंग की। उसने सोचा था कि खौफ फैलाकर वह सुल्तानगंज का बेताज बादशाह बन जाएगा। इस हमले में EO कृष्ण भूषण कुमार शहीद हो गए और सभापति राजकुमार गुड्डू गंभीर रूप से घायल हो गए।
‘सम्राट मॉडल’ और अंत
बिहार में बदली हुई राजनीतिक फिजा और कानून व्यवस्था की कड़ाई का असर 24 घंटे के भीतर दिखा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सख्त आदेश के बाद पुलिस ने उसे घेर लिया। भागने की कोशिश और पुलिस पर फायरिंग के दौरान जवाबी कार्रवाई में रामधनी यादव एनकाउंटर में ढेर कर दिया गया।
निष्कर्ष
रामधनी यादव का चरवाहा से अपराधी बनने का सफर यह बताता है कि कैसे गलत संगत और जल्दी पैसा कमाने की चाहत एक इंसान को मौत के दरवाजे तक ले जाती है। आज सुल्तानगंज की जनता ने राहत की सांस ली है, लेकिन यह घटना व्यवस्था के लिए एक सबक भी है।


