Patna News: बिहार में चल रहे जनगणना कार्यों और डिजिटल डेटा संग्रह को लेकर राज्य सरकार एक्शन मोड में है। सोमवार को मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सभी जिलाधिकारियों (DMs) के साथ स्व-गणना (Self-Enumeration) और हाउस लिस्टिंग ब्लॉक्स (HLB) के कार्यों की उच्च स्तरीय समीक्षा की। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि यह राष्ट्रीय महत्व का कार्य है और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इन जिलों ने मारी बाजी, कुछ को मिली कड़ी चेतावनी
समीक्षा बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने जिलों के प्रदर्शन के आधार पर उनकी रैंकिंग और प्रगति पर चर्चा की:
- स्व-गणना में ‘सुपर 5’: वैशाली, मधुबनी, खगड़िया, भागलपुर और सहरसा ने स्व-गणना कार्य में सबसे शानदार प्रदर्शन किया है।
- जियो-टेगिंग में अग्रणी: हाउस लिस्टिंग ब्लॉक्स के डिमारकेशन और जियो-टेगिंग कार्य में सहरसा, सिवान, रोहतास, पूर्णिया और खगड़िया की प्रगति सबसे बेहतर पाई गई।
- पिछड़े जिलों को निर्देश: जिन जिलों की प्रगति धीमी है, उन्हें मुख्य सचिव ने ‘स्पेशल स्ट्रेटेजी’ बनाकर अगले एक सप्ताह के भीतर काम में तेजी लाने का कड़ा निर्देश दिया है।
तकनीकी बाधाओं के लिए ‘क्विक रिस्पॉन्स टीम’ तैयार
जनगणना कार्य निदेशालय की निदेशक रंजीता ने बैठक में बताया कि मैदानी स्तर पर काम कर रहे प्रगणकों को तकनीकी दिक्कतें न आएं, इसके लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं:
- जिला नोडल अधिकारी: हर जिले में एक नोडल अधिकारी नामित किया गया है जो ट्रेनिंग और जियो-टेगिंग में मदद करेंगे।
- QRT की तैनाती: निदेशालय स्तर पर 3 क्विक रिस्पॉन्स टीमें बनाई गई हैं, जो जिला स्तर की समस्याओं का तुरंत समाधान करेंगी।
- अब तक की उपलब्धि: बिहार में अब तक 3 लाख 28 हजार से अधिक नागरिकों ने स्व-गणना का कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।
मुख्य सचिव का संदेश: “प्रतिदिन करें समीक्षा”
मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने सभी जिलाधिकारियों को सख्त हिदायत दी कि वे स्वयं इस कार्य की प्रतिदिन मॉनिटरिंग करें। उन्होंने कहा कि जियो-टेगिंग और ब्लॉक्स का डिमारकेशन सटीक होना चाहिए क्योंकि इसी पर भविष्य की योजनाओं का खाका निर्भर करता है।


