Bhagalpur News: भारतीय रेल केवल यात्रियों को मंजिल तक नहीं पहुँचाती, बल्कि समय-समय पर मानवीय सेवा की नई मिसाल भी पेश करती है। ऐसा ही एक सराहनीय उदाहरण मालदा मंडल के भागलपुर टिकट जांच स्टाफ ने पेश किया है। विक्रमशिला एक्सप्रेस में अपने माता-पिता से बिछड़े एक छह वर्षीय बालक को रेलकर्मियों की तत्परता और संवेदनशीलता की वजह से सुरक्षित उनके परिजनों तक पहुँचा दिया गया।
अकेले खड़े मासूम पर पड़ी नजर: भागलपुर टीटीई टीम की सतर्कता
विक्रमशिला एक्सप्रेस की घटना:
17 अप्रैल 2026 को ट्रेन संख्या 12367 विक्रमशिला एक्सप्रेस में ड्यूटी के दौरान श्री संजय कुमार पांडेय (वरिष्ठ टीटीई/भागलपुर) और श्री अमित कुमार (टीटीआई/भागलपुर) ने कोच संख्या B5 के दरवाजे के पास एक छोटे बच्चे को अकेले खड़ा देखा। दरवाजे के पास बच्चे का अकेला होना किसी बड़ी अनहोनी का कारण बन सकता था, जिसे देखते हुए रेलकर्मियों ने तुरंत उसे अपने संरक्षण में लिया।
पटना में छूट गए थे परिजन:
पूछताछ में पता चला कि बालक के माता-पिता पटना जंक्शन पर उतर गए थे, लेकिन भीड़ या असावधानी के कारण बालक ट्रेन के अंदर ही रह गया। बच्चा डरा हुआ था, जिसे टीटीई टीम ने ढांढस बंधाया और मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत वाणिज्य नियंत्रण (दानापुर और मालदा) को इसकी सूचना दी।
कोऑर्डिनेशन से मिली सफलता: DDU जंक्शन पर हुआ सुरक्षित मिलन
रेलवे टीम ने बच्चे के परिजनों से संपर्क स्थापित किया और विवरणों का सत्यापन किया। बच्चे के पिता ने जानकारी दी कि वे पं. दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन (DDU) पहुँचकर बच्चे को ले लेंगे। निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते हुए:
- बालक को सुरक्षित रूप से DDU जंक्शन स्थित चाइल्ड हेल्पलाइन टीम को सौंपा गया।
- बाद में पिता के पहुँचने पर कागजी कार्रवाई पूरी कर बच्चा उन्हें सौंप दिया गया।
- अपने कलेजे के टुकड़े को वापस पाकर पिता ने भारतीय रेल और विशेषकर भागलपुर की टीटीई टीम का सहृदय आभार व्यक्त किया।
अधिकारियों ने थपथपाई पीठ: “यात्री सुरक्षा हमारी प्राथमिकता”
मालदा मंडल के मंडल रेल प्रबंधक श्री मनीष कुमार गुप्ता के मार्गदर्शन में हुई इस कार्रवाई की वरिष्ठ अधिकारियों ने सराहना की है। श्री कार्तिक सिंह (वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक, मालदा) ने भागलपुर टीटीई टीम की प्रशंसा करते हुए कहा कि, “ऐसी निष्ठा यात्री सुरक्षा एवं सेवा के प्रति हमारी अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती है। रेलकर्मियों की सजगता से न केवल बच्चे की सुरक्षा सुनिश्चित हुई, बल्कि एक परिवार की खुशियाँ भी लौट आईं।”


