Bhagalpur News: भागलपुर जिला स्थापना दिवस के त्रि-दिवसीय समारोह के दूसरे दिन ‘अंग संस्कृति भवन’ और ‘भागलपुर संग्रहालय’ कला के अनूठे रंगों में रंगा नजर आया। कला एवं संस्कृति विभाग और जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम ने जिले की समृद्ध विरासत और उभरती प्रतिभाओं को एक भव्य मंच प्रदान किया।
लोक गायन और नृत्य में प्रतिभाओं का जलवा
कार्यक्रम का शुभारंभ ‘वंदे मातरम’ और ‘बिहार गीत’ की मधुर प्रस्तुति के साथ हुआ। इसके बाद आयोजित लोक गीत गायन प्रतियोगिता में कड़ी चयन प्रक्रिया के बाद 15 कलाकारों ने मुख्य मंच पर अपनी कला का प्रदर्शन किया।
- लोक गायन: संरोज अली ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि मोहित कुमार और अमन कुमार क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे।
- लोक नृत्य: राहुल कुमार एवं समूह ने अपनी शानदार प्रस्तुति से प्रथम स्थान झटका। किलकारी बिहार बाल भवन दूसरे और सुरभि सुमन का समूह तीसरे स्थान पर रहा।
दृश्य कला: कैनवास पर जीवंत हुए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी
समारोह के दौरान एक विशेष ‘कलाकार कैम्प’ का आयोजन किया गया, जिसका विषय राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का जीवन था। शहर के प्रख्यात कलाकारों—मनोज पंडित, उलूपी झा, बिजय शाह, अनिल कुमार, कुमार संभव और मनोज कुमार ने कैनवास पर गांधीजी के आदर्शों को लोक कला और समसामयिक शैली में उकेरा। वहीं, फोटोग्राफी प्रतियोगिता में कुमार अनुराग और प्रेम केडिया ने अपनी रचनात्मकता से बाजी मारी।
मंजूषा गुरु मनोज पंडित का भव्य सम्मान
अंग प्रान्त की विश्व प्रसिद्ध मंजूषा कला को राष्ट्रपति भवन तक पहचान दिलाने वाले मंजूषा गुरु मनोज पंडित को इस अवसर पर सामूहिक रूप से सम्मानित किया गया। यह सम्मान भागलपुर की लोक कला के प्रति उनके समर्पण और योगदान का प्रतीक है।
सम्मान और सहभागिता
जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी अंकित रंजन ने कुल 150 से अधिक प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाण पत्र प्रदान किए। निर्णायक मंडल के सदस्य के रूप में अरविन्द यादव, अजय अटल, शैलेन्द्र कुमार और गोपाल कृष्ण मिश्रा जैसे दिग्गज कलाकारों को अंग वस्त्र और मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन वैभव राज और अणिमा सिन्हा ने किया।
अगला पड़ाव: ऐतिहासिक धरोहरों का भ्रमण
स्थापना दिवस के तीसरे और अंतिम दिन, विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को जिले की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पहचान—बटेश्वर स्थान और विक्रमशीला महाविहार के भ्रमण पर ले जाया जाएगा। प्रशासन का यह कदम युवाओं को अपनी जड़ों और गौरवशाली इतिहास से जोड़ने की एक महत्वपूर्ण कड़ी है।


