कोलकाता/मालदा: रेलवे का सफर अब केवल एक गंतव्य तक पहुँचना नहीं, बल्कि सम्मान और सुविधा का अनुभव बनता जा रहा है। पूर्व रेलवे (Eastern Railway) ने अपने नेटवर्क के तहत आने वाले स्टेशनों पर शारीरिक बाधाओं को दूर करने के लिए एक बड़ा अभियान चलाया है। मिशन का उद्देश्य स्पष्ट है—समाज के उन वर्गों, जैसे बुजुर्ग, दिव्यांग और बीमार यात्री, के मन से ‘ऊंची सीढ़ियों का डर’ पूरी तरह खत्म करना।
शांति देवी और राजेश जैसे लाखों यात्रियों को मिली ‘आजादी’
रेलवे ने अपनी इस उपलब्धि को मानवीय नजरिए से साझा किया है। जहाँ 85 वर्षीय शांति देवी जैसे बुजुर्ग अब घुटनों के दर्द के बावजूद आधुनिक लिफ्ट के जरिए आसानी से प्लेटफॉर्म तक पहुँच रहे हैं, वहीं राजेश जैसे दिव्यांग युवाओं को अब किसी के सहारे की जरूरत नहीं पड़ती। पूर्व रेलवे के स्टेशनों पर यह बदलाव कंक्रीट के ढांचे से कहीं अधिक यात्रियों के आत्मविश्वास और गरिमा को बढ़ाने वाला साबित हो रहा है।
आंकड़ों में पूर्व रेलवे की ‘सुगम’ प्रगति
31 मार्च 2026 तक पूर्व रेलवे ने अपने विभिन्न मंडलों में सुविधाओं का एक मजबूत ढांचा तैयार कर लिया है:
मंडल (Division) | लिफ्ट की संख्या (Lifts) | एस्केलेटर की संख्या (Escalators) |
|---|---|---|
मालदा (Malda) | 37 | 16 |
हावड़ा (Howrah) | 19 | 26 |
सियालदह (Sealdah) | 14 | 26 |
आसनसोल (Asansol) | 23 | 09 |
कुल (Total) | 93 | 77 |
मिशन 2026-2027: विस्तार की नई योजना
रेलवे यहीं नहीं रुक रहा है। चालू वित्तीय वर्ष (2026-27) के लिए एक व्यापक रोडमैप तैयार किया गया है, जिसके तहत:
- 14 नई लिफ्ट: आसनसोल में 5, मालदा में 6 और सियालदह में 3 नई लिफ्ट लगाई जाएंगी।
- 04 नए एस्केलेटर: आसनसोल मंडल में यात्रियों की भीड़ को देखते हुए 4 नए एस्केलेटर लगाए जाएंगे।
अधिकारियों का संदेश: समावेशन ही प्राथमिकता
पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (CPRO) शिबराम माझि ने बताया कि रेलवे स्टेशनों के अनुभव को शारीरिक परिश्रम के बजाय पूर्ण आराम में बदलना हमारा मूल लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि लिफ्ट और एस्केलेटर का यह निरंतर विस्तार यात्री सेवा के प्रति हमारी गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाता है ताकि कोई भी यात्री अपनी उम्र या शारीरिक स्थिति के कारण यात्रा करने से कतराए नहीं।


