Patna News: बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से नीतीश सरकार ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। राज्य सरकार के ‘सात निश्चय-3’ कार्यक्रम के तहत अब सरकारी सेवा में कार्यरत एलोपैथिक डॉक्टरों के निजी प्रैक्टिस (Private Practice) करने पर पूर्णतः रोक लगा दी गई है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी इस संकल्प को सरकार की सहमति मिल गई है।
इन पर लागू होगा नया नियम
सरकार के इस फैसले का असर राज्य के तीन प्रमुख संवर्गों के चिकित्सकों पर पड़ेगा:
- बिहार स्वास्थ्य सेवा संवर्ग (सामान्य सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर)
- बिहार चिकित्सा शिक्षा सेवा संवर्ग (मेडिकल कॉलेजों के प्रोफेसर और डॉक्टर)
- इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान (IGIC) के चिकित्सा सेवा संवर्ग
मिलेगा गैर-व्यावसायिक भत्ता (NPA)
निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने के बदले सरकार डॉक्टरों को क्षतिपूर्ति के रूप में गैर-व्यावसायिक भत्ता (Non-Practicing Allowance – NPA) या प्रोत्साहन राशि प्रदान करेगी। इसके लिए विस्तृत दिशा-निर्देश सक्षम प्राधिकार के अनुमोदन के बाद जल्द ही अलग से निर्गत किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि इस कदम से डॉक्टर अपना पूरा समय सरकारी अस्पतालों और मरीजों की सेवा में दे सकेंगे।
क्यों लिया गया यह फैसला?
अक्सर यह शिकायतें आती थीं कि सरकारी डॉक्टर अस्पतालों के ड्यूटी समय में भी निजी क्लीनिकों में समय देते हैं, जिससे गरीब मरीजों को सरकारी सुविधाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पाता। ‘सात निश्चय-3’ के तहत स्वास्थ्य क्षेत्र में गुणवत्ता लाने के लिए इस पुरानी और विवादित व्यवस्था को खत्म करने का निर्णय लिया गया है।
प्रशासनिक मुस्तैदी
स्वास्थ्य विभाग के सचिव लोकेश कुमार सिंह के हस्ताक्षर से जारी इस पत्र की प्रतिलिपि राज्य के सभी प्रमंडलीय आयुक्तों, जिलाधिकारियों (DM), मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्यों, अधीक्षकों और सिविल सर्जनों को भेज दी गई है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस आदेश का उल्लंघन करने वाले चिकित्सकों पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।


