Bhagalpur News: भारतीय रेलवे ने रेल परिचालन में सुरक्षा के एक नए युग की शुरुआत की है। 30 मार्च, को पश्चिम रेलवे के वडोदरा-नागदा सेक्शन पर अत्याधुनिक ‘कवच 4.0’ सिस्टम को सफलतापूर्वक कमीशन कर दिया गया। पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक प्रदीप कुमार ने वडोदरा स्टेशन पर कवच प्रणाली से लैस स्पेशल ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर इस ऐतिहासिक उपलब्धि का उद्घाटन किया।
मुंबई-दिल्ली रूट का अधिकतम हिस्सा सुरक्षित
’मिशन रफ्तार’ के तहत मुंबई-नई दिल्ली मुख्य मार्ग को हाई-स्पीड और सुरक्षित बनाने का कार्य तेजी से चल रहा है। पश्चिम रेलवे के निर्धारित 693 रूट किलोमीटर में से अब तक 559.5 किलोमीटर पर कवच प्रणाली स्थापित की जा चुकी है। वडोदरा से गोधरा होते हुए नागदा तक का यह सेक्शन अब सुरक्षा की अतिरिक्त परत से ढका हुआ है।
क्या है ‘कवच’ और यह कैसे काम करता है?
कवच एक स्वदेशी ट्रेन सुरक्षा प्रणाली (ATP) है। यह मानवीय गलतियों के जोखिम को शून्य कर देती है।
- टक्कर से बचाव: यदि एक ही पटरी पर दो ट्रेनें आ जाएं, तो यह सिस्टम स्वतः ही ब्रेक लगा देता है।
- सिग्नल जंपिंग (SPAD): यदि ड्राइवर गलती से लाल सिग्नल पार करता है, तो कवच तुरंत ट्रेन को रोक देता है।
- खराब मौसम में मददगार: कोहरे या कम दृश्यता में भी यह सिस्टम लोको पायलट को सिग्नल की सटीक जानकारी देता है।
कैसे पूरा हुआ यह चुनौतीपूर्ण कार्य?
इस प्रणाली को धरातल पर उतारने के लिए रेलवे ने युद्धस्तर पर काम किया:
- RFID टैग्स: पटरियों पर 6000 से अधिक स्थानों पर रेडियो फ्रीक्वेंसी पहचान टैग लगाए गए।
- टावर और संचार: 26 स्टेशनों और लोकोमोटिव के बीच संपर्क के लिए 39 रेडियो टावर खड़े किए गए।
- नेटवर्क: पूरे मार्ग पर 600 किमी लंबी ऑप्टिकल फाइबर केबल (OFC) बिछाई गई।
- इंजन में अपग्रेड: अब तक 364 लोकोमोटिव (इंजनों) में कवच उपकरण लगाए जा चुके हैं।
स्वदेशी तकनीक पर गर्व
महाप्रबंधक ने बताया कि ‘कवच’ प्रणाली अपने यूरोपीय समकक्षों (ETCS) की तुलना में बहुत सस्ती और उतनी ही प्रभावी है। वर्तमान में इसे WAP-7 और WAG9 जैसे शक्तिशाली इंजनों में लगाया गया है, जिसे जल्द ही अन्य ट्रेनों में भी विस्तार दिया जाएगा।


