Bhagalpur News: तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) एक बार फिर अपनी प्रशासनिक लापरवाही और रिजल्ट में धांधली को लेकर विवादों के घेरे में है। मंगलवार को छात्र संगठन NSUI ने सराय वाजिद अली लेन में एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए। संगठन ने साफ तौर पर कहा कि विश्वविद्यालय में शिक्षा के नाम पर भ्रष्टाचार हो रहा है और हजारों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।
परीक्षा दी पर रिजल्ट में ‘अनुपस्थित’: लापरवाही की पराकाष्ठा
प्रेस कॉन्फ्रेंस की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय अध्यक्ष शाकिब नजीर ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में ऐसे छात्र-छात्राएं हैं जिन्होंने समय पर परीक्षा दी और सभी नियमों का पालन किया, लेकिन जब रिजल्ट आया तो उन्हें ‘Absent’ (अनुपस्थित) दिखा दिया गया।
शाकिब नजीर ने कहा:
“छात्रों ने परीक्षा केंद्र पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन की घोर लापरवाही के कारण उन्हें फेल या अनुपस्थित कर दिया गया है। यह सीधे तौर पर छात्रों के करियर को तबाह करने की साजिश है।”
NEP और एडमिशन को लेकर छात्रों का उत्पीड़न
NSUI ने एक और बड़ा मुद्दा उठाते हुए कहा कि कई छात्र सभी विषयों में पास हैं, इसके बावजूद उन्हें नियमों का गलत हवाला देकर NEP श्रेणी में डाल दिया गया है। इससे उन्हें अगले सेमेस्टर में नामांकन (Admission) लेने से रोका जा रहा है। इसके अलावा, जब छात्र अपनी शिकायत लेकर कार्यालय जाते हैं, तो उनके साथ विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा अभद्र व्यवहार किया जाता है।
अल्टीमेटम: “मांगें पूरी नहीं हुई तो बंद होगा विश्वविद्यालय”
संगठन ने विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने दो प्रमुख मांगें रखी हैं:
- जिन छात्रों को गलत तरीके से अनुपस्थित किया गया है, उन्हें तुरंत ‘Present’ कर रिजल्ट सुधारा जाए।
- जिन्हें NEP किया गया है, उन्हें प्रमोट कर अगले सेमेस्टर में नामांकन की अनुमति दी जाए।
शाकिब नजीर ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द ही इन मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो छात्र संगठन कुलपति का घेराव करेगा, धरना देगा और जरूरत पड़ने पर विश्वविद्यालय में तालाबंदी कर उसे पूरी तरह बंद कराया जाएगा।
मौके पर मौजूद कार्यकर्ता
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में शाकिब नजीर के साथ खुसरो राजा, शाहरुख शेख, तौसीफ लतीफ, हुसैन, ओम कुमार, सैफ खान, अरमान खान, रजनीश कुमार, परवेज आलम और राजू खान समेत कई छात्र नेता मौजूद थे। सभी ने एक स्वर में विश्वविद्यालय प्रशासन की तानाशाही के खिलाफ लड़ने का संकल्प लिया।


