Bhagalpur News: भागलपुर जिले में आपदा के शिकार हुए परिवारों के लिए एक राहत भरी खबर है। जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने आपदा अनुग्रह अनुदान (Ex-gratia Grant) की प्रक्रिया को और अधिक सरल और तेज बनाने के लिए एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। अब प्राकृतिक या गैर-प्राकृतिक आपदा से होने वाली मृत्यु के मामलों में मुआवजे की स्वीकृति देने की शक्ति अपर समाहर्ता (आपदा प्रबंधन) को सौंप दी गई है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
इससे पहले यह शक्ति जिले के सभी अनुमंडल पदाधिकारियों (SDO) के पास थी। जिलाधिकारी ने पाया कि अनुमंडल पदाधिकारियों पर विकास कार्यों, विधि व्यवस्था (Law and Order) और न्यायिक कार्यों का अत्यधिक बोझ रहता है। इस कारण मृतक अनुग्रह अनुदान की फाइलों के निष्पादन में देरी होती थी और पीड़ित परिवारों को समय पर सहायता राशि नहीं मिल पाती थी।
नई व्यवस्था से क्या बदलेगा?
जिलाधिकारी द्वारा आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत शक्तियों का प्रत्यायोजन (Power Delegate) किए जाने के बाद अब प्रक्रिया में निम्नलिखित बदलाव होंगे:
- सीधे अपर समाहर्ता को फाइल: अब जिले के सभी अंचल अधिकारी (CO) मृतक अनुग्रह अनुदान से संबंधित मूल फाइलें अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) को भेजने के बजाय सीधे अपर समाहर्ता, आपदा प्रबंधन, भागलपुर को उपलब्ध कराएंगे।
- त्वरित निष्पादन: मध्यवर्ती स्तर (SDO कार्यालय) के हटने से फाइलों के निपटारे में लगने वाला समय बचेगा।
- जल्द भुगतान: आश्रितों के बैंक खातों में मुआवजे की राशि अब पहले की तुलना में कहीं अधिक तेजी से पहुंच सकेगी।
DM को है अधिकार
विभागीय आदेशों के आलोक में जिला दण्डाधिकारी (DM) ही जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के पदेन अध्यक्ष और ‘इंसिडेंट कमांडर’ होते हैं। इसी शक्ति का उपयोग करते हुए डीएम ने जनहित में कार्यों के बोझ को कम करने और पारदर्शिता लाने के लिए यह आदेश जारी किया है।


