Homeभागलपुर सिटीTMBU के 2600 से अधिक पेंशनरों का फूटा गुस्सा: कुलपति कार्यालय पर...

TMBU के 2600 से अधिक पेंशनरों का फूटा गुस्सा: कुलपति कार्यालय पर प्रदर्शन, लंबित पेंशन को लेकर सौंपा ज्ञापन

TMBU में पेंशनरों का महाजुठान: 2600 से अधिक बुजुर्गों का छलका दर्द, कुलपति को दी बड़े आंदोलन की चेतावनी।

Bhagalpur News: तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) के रिटायर्ड कर्मचारियों और अधिकारियों के सब्र का बांध अब टूट गया है। ‘पेंशनर संघर्ष मंच भागलपुर’ के बैनर तले आज बड़ी संख्या में बुजुर्ग पेंशनरों ने अपनी मांगों को लेकर विश्वविद्यालय कैंपस में जोरदार प्रदर्शन किया। वर्षों तक विश्वविद्यालय को अपनी सेवा देने वाले ये पेंशनर आज अपने हक की राशि के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।

2669 परिवारों पर संकट: महीनों से लंबित है हक की राशि

​प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे नेताओं ने बताया कि विश्वविद्यालय के लगभग 2669 पेंशनर वर्तमान में विभिन्न वित्तीय समस्याओं से जूझ रहे हैं। कई महीनों से पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों का भुगतान न होने के कारण इन बुजुर्गों के सामने दवा और घर चलाने तक का संकट खड़ा हो गया है।

कुलपति को सौंपा ज्ञापन: “आश्वासन नहीं, अब समाधान चाहिए”

​पेंशनरों के एक प्रतिनिधिमंडल ने कुलपति के नाम एक विस्तृत मांग पत्र (ज्ञापन) सौंपा। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उन्होंने बार-बार विश्वविद्यालय प्रशासन को अपनी समस्याओं से अवगत कराया, लेकिन हर बार उन्हें केवल खोखले आश्वासन ही मिले।

पेंशनरों की मुख्य शिकायतें:

  • ​बार-बार आवेदन देने के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई।
  • ​पेंशन गणना और भुगतान में अनावश्यक देरी की जा रही है।
  • ​विश्वविद्यालय प्रशासन का रवैया रिटायर्ड कर्मचारियों के प्रति असंवेदनशील बना हुआ है।

दिग्गजों की हुंकार: “हक की लड़ाई अब होगी तेज”

​इस प्रदर्शन के दौरान विश्वविद्यालय के पूर्व अधिकारियों और कर्मचारी नेताओं ने प्रशासन को दो टूक चेतावनी दी।

रामाशीष (पूर्व कुलसचिव, TMBU): “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस विश्वविद्यालय को हमने सींचा, वहीं आज हमें अपनी पेंशन के लिए प्रदर्शन करना पड़ रहा है। प्रशासन को अविलंब इस पर संज्ञान लेना चाहिए।”

 

अमरेंद्र झा (रिटायर्ड कर्मचारी): “बुढ़ापे में पेंशन ही हमारा एकमात्र सहारा है। अगर विश्वविद्यालय प्रशासन जल्द कार्रवाई नहीं करता, तो हम चुप नहीं बैठेंगे।”

 

पवन कुमार सिंह (संयोजक, पेंशनर समाज): “2669 पेंशनरों का भविष्य अधर में है। यह हमारे स्वाभिमान की लड़ाई है। यदि मांगों पर विचार नहीं हुआ, तो हम तालाबंदी और उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।”

 

आगे क्या? प्रशासन की चुप्पी और पेंशनरों की चेतावनी

​पेंशनरों ने साफ कर दिया है कि यह उनका अंतिम शांतिपूर्ण अनुरोध है। यदि अगले कुछ दिनों में उनके खातों में लंबित राशि नहीं आती है, तो विश्वविद्यालय को बड़े आंदोलन का सामना करना पड़ेगा। अब देखना यह है कि प्रशासन इन बुजुर्गों की सुध लेता है या मामला और तूल पकड़ता है।

विजय सिन्हा
विजय सिन्हाhttp://silktvnews.com
Hindi News, हिंदी न्यूज, Latest News in Hindi, Aaj ki Taaja Khabar पढ़ें SilkTVNews पर.
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular