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PLI योजना पर UFBU का बड़ा विरोध, DFS के निर्देश को बताया जल्दबाजी और असंतुलन बढ़ाने वाला कदम

स्केल IV और उससे ऊपर के अधिकारियों को PLI देने पर उठे सवाल सुलह प्रक्रिया के बीच लागू करने पर यूनियनों ने जताई नाराजगी “संस्थागत समानता और औद्योगिक सौहार्द पर पड़ेगा असर”

New Delhi: सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन (PLI) को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (UFBU) ने वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (DFS) द्वारा जारी हालिया निर्देश पर कड़ी आपत्ति जताई है और इसे सुलह प्रक्रिया को कमजोर करने वाला कदम बताया है।
UFBU ने कहा कि DFS ने 18 मार्च 2026 को जारी अपने निर्देश में स्केल IV से लेकर उच्च अधिकारियों तक के लिए PLI लागू करने की बात कही है, जबकि यह मुद्दा अभी मुख्य श्रम आयुक्त (CLC) के समक्ष सुलह प्रक्रिया में विचाराधीन है। यूनियनों के अनुसार, 9 मार्च को हुई बैठक में इस विषय पर चर्चा हुई थी और यह सहमति बनी थी कि आगे की कार्रवाई द्विपक्षीय वार्ता के जरिए होगी। ऐसे में महज कुछ दिनों के भीतर इस योजना को लागू करने का निर्देश देना पूरी प्रक्रिया को कमजोर करता है।
यूनियन ने आरोप लगाया कि यह फैसला बैंकिंग क्षेत्र में वर्षों से चली आ रही द्विपक्षीय औद्योगिक संबंधों की परंपरा के खिलाफ है। वर्तमान व्यवस्था के तहत PLI बैंक के सामूहिक प्रदर्शन से जुड़ा होता है और सभी कर्मचारियों के लिए समान रूप से लागू होता है। लेकिन नई योजना व्यक्तिगत प्रदर्शन आधारित है, जिससे कार्यबल के भीतर असमानता और विभाजन की स्थिति पैदा हो सकती है।
UFBU ने इस योजना के वित्तीय प्रभावों पर भी चिंता जताई है। यूनियन का कहना है कि जहां अभी तक कर्मचारियों और मध्य प्रबंधन स्तर के अधिकारियों को अधिकतम 15 दिनों के वेतन के बराबर PLI मिलता है, वहीं नई योजना में वरिष्ठ अधिकारियों को 365 दिनों तक के वेतन के बराबर प्रोत्साहन देने का प्रावधान है। इससे बैंकिंग क्षेत्र पर वित्तीय दबाव बढ़ सकता है और संसाधनों के असंतुलित उपयोग का खतरा उत्पन्न हो सकता है।
यूनियन ने यह भी कहा कि इस तरह की “Bell Curve” आधारित मूल्यांकन प्रणाली वैश्विक स्तर पर अप्रभावी साबित हो चुकी है और कई बड़ी कंपनियां इसे छोड़ चुकी हैं। ऐसे में बैंकिंग क्षेत्र में इसे लागू करना व्यावहारिक नहीं है।
UFBU ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि इस निर्देश को वापस नहीं लिया गया, तो इससे कर्मचारियों में असंतोष बढ़ेगा और औद्योगिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है। यूनियन ने सरकार, भारतीय बैंक संघ और बैंक प्रबंधन से अपील की है कि इस मुद्दे को सुलह प्रक्रिया के तहत ही सुलझाया जाए, ताकि पारदर्शिता, समानता और संतुलन बना रहे।

विजय सिन्हा
विजय सिन्हाhttp://silktvnews.com
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