Bhagalpur News: रेशम नगरी भागलपुर में इन दिनों ‘सूखा नशा’ यानी ब्राउन शुगर का कारोबार जड़ें जमा चुका है। स्मार्ट सिटी के नाम से मशहूर यह शहर अब एक डरावनी सामाजिक समस्या की चपेट में है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस जानलेवा लत ने अब मासूम बच्चों और किशोरों के दरवाजों पर दस्तक दे दी है। यह नशा न केवल युवाओं के शरीर को खोखला कर रहा है, बल्कि शहर की कानून व्यवस्था के लिए भी बड़ी चुनौती बन गया है।
बिना गंध का ‘साइलेंट किलर’: क्यों बढ़ रहा है इसका चलन?
विशेषज्ञों के अनुसार, ब्राउन शुगर का सबसे खतरनाक पहलू इसका ‘गंधहीन’ होना है। शराब या अन्य नशों की तरह इसमें मुंह से दुर्गंध नहीं आती, जिसके कारण छात्र और युवा इसे आसानी से अपने परिजनों से छिपा लेते हैं।
- एक हफ्ते में लत: महज 7 दिनों का लगातार सेवन किसी को भी इसका गुलाम बना सकता है।
- अपराध का रास्ता: नशे की तलब पूरी करने के लिए पैसे न होने पर युवा चोरी, छिनतई और लूट जैसी वारदातों में शामिल हो रहे हैं।
- व्यवहार में बदलाव: लत लगने के बाद पीड़ित के स्वभाव में चिड़चिड़ापन और नकारात्मकता घर कर लेती है।
प्रशासन का ‘टू-वे’ प्लान: सप्लाई और डिमांड पर प्रहार
सिटी डीएसपी अजय कुमार चौधरी ने इस गंभीर मुद्दे पर कड़ा रुख अख्तियार किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस दो मोर्चों पर काम कर रही है:
- सप्लाई चेन पर वार: पुलिस नशा तस्करों और उनके सिंडिकेट की पहचान कर रही है। छापेमारी तेज कर दी गई है ताकि नशे की उपलब्धता को खत्म किया जा सके।
- डिमांड में कमी: स्कूलों, मोहल्लों और गांवों में जागरूकता अभियान चलाकर बच्चों को इस जहर से दूर रहने की शिक्षा दी जा रही है।
अभिभावकों से अपील: “सतर्क रहें, संवाद करें”
सिटी डीएसपी ने जिले के सभी माता-पिता और शिक्षकों से भावुक अपील की है। उन्होंने कहा कि पुलिस अकेले इस जंग को नहीं जीत सकती।
”अभिभावक अपने बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखें। उन्हें पढ़ाई और खेलकूद के लिए प्रेरित करें। अगर आसपास कोई संदिग्ध गतिविधि दिखे या कोई नशा बेचता पाया जाए, तो तुरंत पुलिस को सूचना दें। आपकी एक जानकारी आने वाली पीढ़ी का भविष्य बचा सकती है।”
— अजय कुमार चौधरी, सिटी डीएसपी, भागलपुर


