Bhagalpur News: सिल्क सिटी को ‘स्मार्ट सिटी’ बनाने का दावा अब शहर की सड़कों पर लगा हुआ ‘ट्रैफिक का ग्रहण’ फीका कर रहा है। तातारपुर से लेकर स्टेशन चौक तक की सड़कें इन दिनों आम जनता के लिए किसी मुसीबत से कम नहीं हैं। हर दिन लगने वाले भीषण जाम ने शहर की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है, जिससे न केवल समय की बर्बादी हो रही है बल्कि लोगों का धैर्य भी जवाब देने लगा है।
सुबह-शाम ‘महाजाम’ का तांडव
शहर के सबसे व्यस्त मार्ग तातारपुर-स्टेशन रोड पर सुबह और शाम के समय हालात बद से बदतर हो जाते हैं। वाहनों की लंबी कतारें इस कदर लग जाती हैं कि पैदल चलना भी दूभर हो जाता है।
- ट्रेनें छूट रही हैं: सबसे ज्यादा परेशानी उन यात्रियों को हो रही है जो ट्रेन पकड़ने के लिए स्टेशन जा रहे हैं। कई बार घंटों जाम में फंसने के कारण यात्रियों की ट्रेनें तक छूट जा रही हैं।
- स्कूल-ऑफिस पर असर: स्कूल जाने वाले मासूम बच्चे और दफ्तर जाने वाले कर्मचारी इस अव्यवस्था की सबसे बड़ी कीमत चुका रहे हैं।
आखिर क्यों फेल हो रहा ‘स्मार्ट’ प्लान?
स्थानीय लोगों और व्यापारियों का मानना है कि भागलपुर की इस समस्या के पीछे तीन मुख्य कारण हैं:
- अव्यवस्थित ट्रैफिक: सड़कों पर ट्रैफिक पुलिस की तैनाती और मैनेजमेंट का अभाव साफ नजर आता है।
- अतिक्रमण का बोलबाला: सड़क किनारे लगी अवैध दुकानों और फुटपाथ पर बढ़ते अतिक्रमण ने सड़कों को संकरा कर दिया है।
- प्रशासनिक उदासीनता: स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद बुनियादी ट्रैफिक समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।
“हम रोज घंटों जाम में फंसते हैं। प्रशासन सिर्फ दावे करता है, लेकिन जमीन पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। भागलपुर अब स्मार्ट सिटी नहीं, जाम सिटी बन गया है।” > — एक स्थानीय नागरिक
जनता की मांग: ठोस कदम उठाए प्रशासन
शहरवासियों ने अब प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। लोगों की मांग है कि:
- सड़क किनारे से अतिक्रमण को तुरंत हटाया जाए।
- स्टेशन चौक और तातारपुर जैसे संवेदनशील पॉइंट्स पर ट्रैफिक जवानों की संख्या बढ़ाई जाए।
- वाहनों के लिए पार्किंग की उचित व्यवस्था हो ताकि सड़कें खाली रहें।
अगर समय रहते भागलपुर प्रशासन और स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया, तो वह दिन दूर नहीं जब शहर की पूरी अर्थव्यवस्था इस ट्रैफिक जाम की भेंट चढ़ जाएगी। भागलपुर को ‘स्मार्ट’ बनाने से पहले उसे ‘जाम मुक्त’ बनाना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।


