Patna News: राज्य में सरकारी भवनों के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए भवन निर्माण विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। विभाग की ओर से नवनिर्माण और जीर्णोद्धार कार्यों की निगरानी के लिए 10 विशेष उड़नदस्ता दलों (फ्लाइंग स्क्वॉड) का गठन किया गया है। इन दलों का मुख्य उद्देश्य निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर नजर रखना और निर्माण सामग्री की वैज्ञानिक जांच सुनिश्चित करना है।
विभाग के अनुसार प्रत्येक उड़नदस्ता दल में अधीक्षण अभियंता, कार्यपालक अभियंता और सहायक अभियंता स्तर के अधिकारियों को शामिल किया गया है। ये दल राज्य के विभिन्न जिलों में चल रहे निर्माण कार्यों का औचक निरीक्षण करेंगे और कार्य स्थल से निर्माण सामग्री के नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजेंगे।
विशेष रूप से भवनों में किए जा रहे विद्युत कार्यों की गुणवत्ता की जांच के लिए भी अलग से उड़नदस्ता दल को जिम्मेदारी दी गई है। निरीक्षण के दौरान टीम निर्माण स्थल से ईंट, बालू, गिट्टी और कंक्रीट क्यूब जैसे नमूने एकत्र करेगी, जिन्हें अंचल स्तरीय अथवा केंद्रीय प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए भेजा जाएगा।
पारदर्शिता बनाए रखने के लिए विभाग ने यह व्यवस्था की है कि उड़नदस्ता दल में शामिल अधीक्षण अभियंता अपने पदस्थापन अंचल के बजाय अन्य प्रमंडलों की योजनाओं की जांच करेंगे। सभी उड़नदस्ता दल मुख्य अभियंता (गुणवत्ता अनुश्रवण) के नियंत्रण में कार्य करेंगे।
विभागीय सचिव Kumar Ravi ने बताया कि मजबूत और टिकाऊ भवनों के निर्माण के लिए यह एक महत्वपूर्ण पहल है। उड़नदस्ता दल द्वारा की गई जांच के बाद उसकी रिपोर्ट की समीक्षा की जाएगी और यदि कहीं भी गुणवत्ता में कमी पाई जाती है तो आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने यह भी बताया कि विभाग की केंद्रीय प्रयोगशाला में निर्माण सामग्री की जांच के लिए 55 से अधिक आधुनिक उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है। इन अत्याधुनिक यंत्रों की मदद से पुरानी, निर्माणाधीन और भविष्य की संरचनाओं की गुणवत्ता का गहन परीक्षण किया जा सकता है।
विभाग का कहना है कि समय-समय पर विशेष अभियान चलाकर भी निर्माण कार्यों की निगरानी की जा रही है ताकि सरकारी भवनों के निर्माण में गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता न हो और सार्वजनिक संपत्ति का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।


