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भागलपुर में सहकारिता को नई दिशा: पैक्स पदाधिकारियों को व्यवसायिक मॉडल अपनाने का मिला मंत्र

एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में जिलाधिकारी ने कहा – पैक्स को बनाएं आत्मनिर्भर, विविधिकरण से बढ़ेगी आय और मजबूती

Bhagalpur News: भागलपुर के टाउन हॉल में गुरुवार को सहकारिता विभाग द्वारा पैक्स अध्यक्षों, प्रबंधकों एवं व्यापार मंडल अध्यक्षों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्घाटन जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी, भागलपुर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह, अपर समाहर्ता (आपदा प्रबंधन) कुंदन कुमार तथा नाबार्ड के जिला प्रबंधक द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि सहकारिता व्यवस्था के सबसे निचले स्तर पर कार्यरत पैक्स पदाधिकारी इस तंत्र की रीढ़ हैं। उनका प्रशिक्षण और सशक्तिकरण ही सहकारिता आंदोलन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है। उन्होंने बताया कि अब पैक्स केवल ऋण वितरण और वसूली तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सरकार की नई सोच के तहत इन्हें बहुआयामी और व्यवसायिक इकाई के रूप में विकसित किया जा रहा है।
जिलाधिकारी ने कहा कि अधिप्राप्ति (प्रोक्योरमेंट) कार्य के जुड़ने से पैक्स की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। अब सरकार पैक्स को और अधिक मजबूत बनाने के लिए व्यवसायिक विविधिकरण पर जोर दे रही है। इसके तहत पैक्स को मुख्यमंत्री हरित कृषि संयंत्र योजना, कॉमन सर्विस सेंटर, जन औषधि केंद्र, प्रधानमंत्री किसान समृद्धि योजना तथा पेट्रोल पंप जैसी योजनाओं से जोड़ा जा रहा है।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना के अंतर्गत पैक्स स्तर पर गोदाम निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस योजना के तहत 1500 मीट्रिक टन से लेकर 10,000 मीट्रिक टन क्षमता तक के गोदाम बनाए जा रहे हैं, जिससे किसानों को फसल भंडारण में सुविधा मिलेगी और उन्हें बेहतर मूल्य प्राप्त हो सकेगा।
तकनीकी सशक्तिकरण की दिशा में भी भागलपुर जिला आगे बढ़ रहा है। नाबार्ड के सहयोग से जिले के कुल 160 पैक्सों का कंप्यूटरीकरण किया जा चुका है, जिससे कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और दक्षता आई है। इसके अलावा सहकारिता के दायरे को बढ़ाते हुए प्रखंड स्तर पर बकरी पालन समिति, मधुमक्खी पालन समिति, अनुमंडल उपभोक्ता भंडार तथा किसान उत्पादन संगठन (FPO) की स्थापना भी की गई है।
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि 28 जीविका समूहों को स्वावलंबी समिति के रूप में निबंधित किया गया है, जिससे ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिल रहा है।
अंत में जिलाधिकारी ने सभी प्रतिभागियों से अपील की कि वे प्रशिक्षण में प्राप्त ज्ञान का उपयोग कर सहकारी योजनाओं को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रशासन हर संभव सहयोग के लिए तत्पर रहेगा।
यह कार्यशाला सहकारिता क्षेत्र में नई ऊर्जा और दिशा प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे आने वाले समय में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

विजय सिन्हा
विजय सिन्हाhttp://silktvnews.com
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