नई दिल्ली | ब्यूरो रिपोर्ट: भारत के प्रशासनिक इतिहास में कल, 1 अप्रैल 2026 का दिन एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज होने जा रहा है। केंद्र सरकार देश की पहली ‘डिजिटल जनगणना’ (Digital Census) के पहले चरण का शंखनाद करने जा रही है। अब तक कागजों और फाइलों में सिमटी रहने वाली दुनिया की सबसे बड़ी गणना प्रक्रिया अब पूरी तरह हाई-टेक होने जा रही है।
कल से शुरू होगा पहला चरण: मकानों की होगी लिस्टिंग
जनगणना 2026 के पहले चरण में ‘हाउस लिस्टिंग’ यानी मकानों की सूची तैयार करने का काम शुरू होगा। इसके साथ ही राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) को अपडेट करने की प्रक्रिया भी समानांतर रूप से चलेगी। देश भर में लाखों प्रगणक (Enumerators) अपने मोबाइल फोन और टैबलेट के साथ घर-घर पहुंचेंगे और डिजिटल माध्यम से सटीक जानकारी एकत्र करेंगे।
सेल्फ इन्युमरेशन (Self-Enumeration): खुद भी भर सकेंगे अपनी जानकारी
इस बार की जनगणना की सबसे बड़ी विशेषता ‘सेल्फ इन्युमरेशन’ की सुविधा है। सरकार द्वारा जारी किए गए विशेष मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल के माध्यम से नागरिक स्वयं अपनी और अपने परिवार की जानकारी पोर्टल पर अपलोड कर सकेंगे। इसके लिए उन्हें एक रेफरेंस नंबर दिया जाएगा, जिसे बाद में प्रगणक को दिखाकर वेरिफिकेशन कराया जा सकेगा। इससे समय की बचत होगी और डेटा की गोपनीयता भी बनी रहेगी।
क्यों खास है डिजिटल जनगणना?
डिजिटल जनगणना का सबसे बड़ा लाभ डेटा की सटीकता और तेजी है। पहले की जनगणना रिपोर्ट आने में कई साल लग जाते थे, लेकिन डिजिटल माध्यम से डेटा रियल-टाइम में सर्वर पर स्टोर होगा। इससे सरकार को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आवास जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं का खाका तैयार करने में भारी मदद मिलेगी। ‘वन नेशन, वन डेटा’ के संकल्प को पूरा करने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है।
सुरक्षा और गोपनीयता का पुख्ता इंतजाम
डिजिटल डेटा को लेकर उठने वाले सवालों पर सरकार ने स्पष्ट किया है कि नागरिकों की जानकारी पूरी तरह सुरक्षित रहेगी। डेटा को एन्क्रिप्टेड फॉर्म में स्टोर किया जाएगा और इसका उपयोग केवल सांख्यिकीय उद्देश्यों और नीति निर्धारण के लिए किया जाएगा।


