Patna News: बिहार सरकार के समाज कल्याण विभाग द्वारा राज्य में अंधापन और दृष्टि दोष की रोकथाम के लिए चलाया जा रहा विशेष अभियान अब अपने निर्णायक मोड़ पर है। सोमवार, 6 अप्रैल से इस महा-अभियान का तीसरा और अंतिम चरण शुरू हो गया है। इस चरण के तहत राज्य के 26 जिलों के 51 बुनियाद केंद्रों पर शिविर लगाकर लोगों की आँखों की मुफ्त स्क्रीनिंग की जा रही है।
26 जिलों में फैला अभियान का जाल
तीसरे चरण में बिहार के सीमावर्ती इलाकों से लेकर मध्य बिहार तक के 26 जिलों को कवर किया जा रहा है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- उत्तर एवं पूर्वी बिहार: अररिया, पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, अररिया।
- अंग एवं मिथिलांचल: भागलपुर, बांका, दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर।
- मगध एवं शाहाबाद: गया, औरंगाबाद, नवादा, भोजपुर, बक्सर, कैमूर, रोहतास।
- अन्य जिले: बेगुसराय, लखीसराय, सारण, शिवहर, सीतामढ़ी, पूर्वी एवं पश्चिमी चंपारण।
1 लाख चश्मा वितरण का संकल्प
सरकार ने इस अभियान को केवल जाँच तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि जरूरतमंदों को मुफ्त चश्मा भी उपलब्ध कराया जा रहा है।
- वितरण लक्ष्य: प्रत्येक बुनियाद केंद्र पर 1000 चश्मे बांटने का लक्ष्य है, जिससे पूरे राज्य में कुल 1 लाख चश्मे वितरित किए जाएंगे।
- अब तक की प्रगति: पहले और दूसरे चरण (जो 23 और 30 मार्च से शुरू हुए थे) में अब तक 16,764 लोगों की जाँच की जा चुकी है, जिनमें से 14,048 लोगों को चश्मा देने के लिए चिन्हित किया गया है।
- समय सीमा: आँखों की जाँच के 15 दिनों के भीतर चश्मा वितरण की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
सचिव बंदना प्रेयषी ने लिया व्यवस्थाओं का जायजा
अभियान की गंभीरता को देखते हुए विभाग की सचिव बंदना प्रेयषी स्वयं जमीनी स्तर पर निगरानी कर रही हैं। रविवार को उन्होंने पुपरी (सीतामढ़ी) स्थित बुनियाद केंद्र का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने शिविर में आए बुजुर्गों और आम लोगों से बातचीत की और केंद्र प्रबंधकों को निर्देश दिया कि इस शिविर का व्यापक प्रचार-प्रसार करें ताकि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को भी इसका लाभ मिले।
हेल्पलाइन नंबर: घर बैठे मिलेगी जानकारी
आम लोगों की सुविधा के लिए ‘सक्षम’ द्वारा एक टोल-फ्री नंबर जारी किया गया है।
टोल-फ्री नंबर: 18003456262 > इस नंबर पर कॉल करके आप अपने नजदीकी बुनियाद केंद्र का पता और शिविर की तारीखों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री के ‘सक्षम’ बिहार के सपने को साकार करने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है। राज्य स्वास्थ्य समिति से सूचीबद्ध विशेषज्ञ एजेंसियों द्वारा की जा रही यह स्क्रीनिंग न केवल लोगों को मोतियाबिंद और दृष्टि दोष से बचाएगी, बल्कि बिहार को अंधापन मुक्त बनाने में मील का पत्थर साबित होगी।


