Bhagalpur News: बिहार की शैक्षणिक राजधानी कहे जाने वाले भागलपुर के टाउन हॉल में आज जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी की अध्यक्षता में जिले के तमाम प्रस्वीकृति प्राप्त निजी स्कूलों के संचालकों, प्रबंधकों और प्राचार्यों के साथ एक हाई-प्रोफाइल समीक्षात्मक बैठक संपन्न हुई। इस मैराथन बैठक में जिलाधिकारी ने कड़े लहजे में स्पष्ट कर दिया कि निजी स्कूलों की मनमानी के दिन अब लद चुके हैं।
री-एडmission फीस पर सख्त रोक: अभिभावकों को बड़ी राहत
अभिभावकों की जेब पर डाका डालने वाली ‘री-एडमिशन फीस’ (पुनः नामांकन शुल्क) को लेकर जिलाधिकारी का रुख बेहद सख्त रहा। उन्होंने कहा:
- यदि छात्र उसी स्कूल में अगली कक्षा में जा रहा है, तो दोबारा नामांकन शुल्क लेना नियमों का उल्लंघन है।
- ’एनुअल चार्ज’ या ‘डेवलपमेंट फीस’ के नाम पर वसूली जा रही भारी-भरकम राशि पर प्रशासन की पैनी नजर है।
- नियमों की अवहेलना करने वाले संस्थानों के खिलाफ प्रशासन कठोरतम कानूनी कार्रवाई करेगा।
“अमीर-गरीब का भेदभाव खत्म करें स्कूल”
जिलाधिकारी ने स्कूलों को चेतावनी देते हुए कहा कि शिक्षा के मंदिर में बच्चों के बीच सामाजिक या मानसिक भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने दो-टूक कहा, “स्कूल की पहचान उसके परीक्षा परिणाम और वहां से निकलने वाले चरित्रवान नागरिकों से होनी चाहिए, न कि उसकी भव्य इमारत या ऊँची फीस से।” यह बयान उन स्कूलों के लिए एक बड़ा झटका है जो शिक्षा को एक ‘लग्जरी ब्रांड’ की तरह पेश कर रहे हैं।
प्रशासनिक अमले की मौजूदगी से हड़कंप
बैठक में उप विकास आयुक्त प्रदीप कुमार सिंह और जिला शिक्षा पदाधिकारी राज कुमार शर्मा की उपस्थिति ने यह साफ कर दिया कि यह केवल एक चेतावनी नहीं, बल्कि एक व्यापक प्रशासनिक सुधार की शुरुआत है। शिक्षा विभाग अब नियमित रूप से निजी स्कूलों के शुल्क ढांचे और उनके द्वारा दी जा रही सुविधाओं की निगरानी करेगा।
बैठक के मुख्य अंश:
बिंदु | जिलाधिकारी के निर्देश |
|---|---|
नामांकन शुल्क | उसी स्कूल में प्रमोट होने वाले बच्चों से दोबारा फीस लेना प्रतिबंधित। |
भेदभाव | अमीर और गरीब बच्चों के बीच किसी भी प्रकार का सामाजिक अलगाव न हो। |
संस्थान की छवि | स्कूल केवल ‘ब्रांडिंग’ पर नहीं, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता पर ध्यान दें। |
अनुपालन | सरकारी निर्देशों की अवहेलना पर सीधे कानूनी कार्रवाई की जाएगी। |


