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विक्रमशिला सेतु पर गहराया संकट: एक पिलर की सुरक्षा दीवार ध्वस्त, दो अन्य क्षतिग्रस्त; प्रशासन में मचा हड़कंप

भागलपुर की लाइफलाइन पर संकट: सीमांचल और कोसी क्षेत्र को जोड़ने वाले एकमात्र पुल की हालत नाजुक।

Bhagalpur News: बिहार की लाइफलाइन और गंगा नदी पर बने प्रसिद्ध विक्रमशिला सेतु को लेकर एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आ रही है। पुल के पिलर संख्या 16 से 20 के बीच स्थित तीन पिलरों की सुरक्षा दीवार (प्रोटेक्शन वॉल) को भारी नुकसान पहुँचा है। स्थिति इतनी गंभीर है कि एक पिलर की दीवार पूरी तरह ढह चुकी है, जबकि दूसरे का हिस्सा टूटकर हवा में लटक रहा है।

मुख्य पिलर के ढांचे को पहुँच सकता है गंभीर नुकसान

​विशेषज्ञों और इंजीनियरों का मानना है कि टूटकर लटक रही प्रोटेक्शन वॉल के भारी हिस्से अगर बार-बार मुख्य पिलर से टकराएंगे, तो इससे पुल के मुख्य ढांचे (Main Structure) को स्थायी नुकसान पहुँच सकता है। पानी के तेज बहाव, बड़े जहाजों या भारी नावों के सीधे टकराव से पिलर में कंपन (Vibration) या दरार (Crack) आने का खतरा बढ़ गया है।

क्यों जरूरी है पिलर की प्रोटेक्शन वॉल?

​प्रोटेक्शन वॉल, जिसे तकनीकी भाषा में ‘फॉल्स वॉल’ भी कहा जाता है, पिलर की नींव (Well Foundation) के लिए एक ढाल की तरह काम करती है। इसके मुख्य कार्य निम्नलिखित हैं:

  • मिट्टी का कटाव रोकना: यह दीवार पिलर के नीचे की मिट्टी और बालू को पानी के झोंकों से खिसकने से रोकती है।
  • पानी के करंट को मोड़ना: बरसात और बाढ़ के समय यह पानी की तेज धार को पिलर से दूर डाइवर्ट करती है।
  • वजन और संतुलन: एक प्रोटेक्शन वॉल का वजन लगभग 1000 किलोग्राम (25 मन) होता है। इसके टूटने से पिलर के संतुलन और सुरक्षा घेरे पर असर पड़ता है।

प्रशासनिक कार्रवाई और आधिकारिक रिपोर्ट

​मामला उजागर होने के बाद NH विभाग (नेशनल हाईवे) के अधिकारियों की टीम ने स्टीमर की सहायता से क्षतिग्रस्त पिलरों का जायजा लिया है। कार्यपालक अभियंता साकेत कुमार रोशन ने पुष्टि की है कि:

  • ​पिलर संख्या 16 से 20 के बीच नुकसान की रिपोर्ट तैयार की गई है।
  • ​इस संबंध में एक विस्तृत रिपोर्ट मुख्यालय को भेज दी गई है ताकि जल्द मरम्मत शुरू हो सके।
  • ​जरूरत पड़ने पर पुल पर भारी वाहनों (Heavy Vehicles) के परिचालन पर रोक लगाने पर भी विचार किया जा रहा है ताकि किसी भी अनहोनी को टाला जा सके।

क्या पुल के गिरने का खतरा है?

​इंजीनियरों के अनुसार, विक्रमशिला सेतु के पिलर गंगा नदी में लगभग 60 मीटर नीचे तक धंसे हुए हैं। इस कारण फिलहाल पुल के गिरने का तत्काल खतरा कम है। हालांकि, विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रोटेक्शन वॉल को तुरंत दुरुस्त नहीं किया गया, तो बाढ़ के समय पानी अंदर घुसने से मिट्टी खिसक सकती है, जिससे भविष्य में पुल की नींव कमजोर हो जाएगी।

 समय रहते कदम उठाना अनिवार्य

​विक्रमशिला सेतु भागलपुर को सीमांचल और कोसी क्षेत्र से जोड़ने वाला एकमात्र प्रमुख मार्ग है। रोजाना हजारों की संख्या में छोटे-बड़े वाहन इस पर निर्भर हैं। स्थानीय निवासियों और यात्रियों की मांग है कि सरकार और विभाग इस मामले को गंभीरता से लें और युद्ध स्तर पर मरम्मत कार्य शुरू करें, अन्यथा यह पूरे अंग क्षेत्र के लिए एक बड़े परिवहन संकट का कारण बन सकता है।

विजय सिन्हा
विजय सिन्हाhttp://silktvnews.com
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