Kolkata News: रेलवे ट्रैक पर मवेशियों की आवाजाही एक गंभीर समस्या बनती जा रही है, जिसे लेकर पूर्वी रेलवे ने एक बार फिर आम लोगों से जिम्मेदारी निभाने की अपील की है। रेलवे प्रशासन का कहना है कि यह न सिर्फ मवेशियों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है, बल्कि ट्रेनों के संचालन को भी प्रभावित कर रहा है।
पूर्वी रेलवे द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 1 जनवरी 2026 से 25 मार्च 2026 के बीच मवेशियों के ट्रेन से कटने की कुल 72 घटनाएं दर्ज की गई हैं। इन घटनाओं में कई निर्दोष पशुओं की मौत हो चुकी है, वहीं ट्रेनों की आवाजाही भी बाधित हुई है, जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा है।
रेलवे ट्रैक मूल रूप से ट्रेनों के लिए सुरक्षित और बाधा रहित मार्ग होता है, जहां किसी भी प्रकार का अतिक्रमण पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद, कई जगहों पर लोग अपने मवेशियों को खुले में छोड़ देते हैं, जिससे वे चारे की तलाश में रेलवे पटरियों तक पहुंच जाते हैं। पटरियों के बीच उगने वाले हरे पौधे मवेशियों को आकर्षित करते हैं, और इसी दौरान वे हादसों का शिकार हो जाते हैं।
पूर्वी रेलवे ने इस समस्या से निपटने के लिए समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाए हैं। इन अभियानों में स्थानीय ग्रामीणों को शामिल कर उन्हें रेलवे ट्रैक के खतरे के बारे में बताया जाता है। साथ ही, रेलवे पटरियों के किनारे अवरोध (बैरिकेड्स) भी लगाए जा रहे हैं, ताकि अनधिकृत रूप से ट्रैक पार करने की घटनाओं को रोका जा सके। हालांकि, रेलवे अधिकारियों का मानना है कि जब तक स्थानीय लोग खुद जागरूक नहीं होंगे, तब तक इन उपायों का पूरा लाभ नहीं मिल पाएगा।
प्रेस विज्ञप्ति में यह भी बताया गया है कि कुछ रेलखंड ऐसे हैं जहां मवेशियों के कटने की घटनाएं अधिक हो रही हैं। इनमें सीतारामपुर-मधुपुर, अंडाल-आसनसोल, देवघर-बांका, सैंथिया-नलहाटी, भागलपुर-बांका, साहिबगंज-बरहरवा और किउल-भागलपुर रेलखंड प्रमुख रूप से शामिल हैं। इन क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।
पूर्वी रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिबराम मांझी ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि रेलवे लाइनों के आसपास रहने वाले लोग अपने मवेशियों की देखभाल में अधिक जिम्मेदारी दिखाएं। यदि मवेशियों को ठीक से बांधकर रखा जाए और उन्हें रेलवे ट्रैक के पास न जाने दिया जाए, तो इससे दोहरा लाभ होगा। एक ओर जहां पशुधन की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, वहीं दूसरी ओर ट्रेन संचालन भी सुचारु रूप से चलता रहेगा।
रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह सिर्फ एक सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामाजिक दायित्व भी है। लोगों की छोटी-सी लापरवाही न सिर्फ उनके पशुओं की जान ले सकती है, बल्कि बड़े रेल हादसे का कारण भी बन सकती है। ऐसे में सभी नागरिकों से अपेक्षा की जा रही है कि वे सतर्क रहें और रेलवे सुरक्षा नियमों का पालन करें।
रेलवे ट्रैक पर मवेशी बन रहे खतरा: पूर्वी रेलवे ने लोगों से की जिम्मेदारी निभाने की अपील
1 जनवरी से 25 मार्च 2026 तक 72 मवेशियों की ट्रेन से कटकर मौत, भागलपुर-बांका समेत कई रूट संवेदनशील—रेलवे ने जागरूकता बढ़ाने पर दिया जोर


