भागलपुर | 04 फरवरी 2026: भागलपुर में पारिवारिक विवाद के बीच इंसानियत और समझदारी की मिसाल देखने को मिली, जब शरान्य राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन की पहल से एक टूटता हुआ परिवार दोबारा एक सूत्र में बंध गया। बबरगंज थाना क्षेत्र का यह मामला उस वक्त गंभीर हो गया था, जब पिता और पुत्रवधू के बीच मारपीट और आरोप-प्रत्यारोप के बाद पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा और ससुर को हिरासत में लिया गया।
विवाद की जानकारी मिलते ही 4 फरवरी 2026 को शरान्य राष्ट्रीय मानवाधिकार के प्रधान कार्यालय में दोनों पक्षों को बुलाकर बातचीत कराई गई। संगठन के पदाधिकारियों ने धैर्य और संवेदनशीलता के साथ सभी की बातें सुनीं और माहौल को शांत कर समाधान की दिशा में पहल की। लंबी चर्चा के बाद पिता, पुत्र और पुत्रवधू के बीच लिखित समझौता कराया गया।
समझौते के अनुसार परिवार में अब किसी भी तरह का झगड़ा नहीं होगा। शांति बनाए रखने के उद्देश्य से रहने की अलग-अलग व्यवस्था तय की गई। इसके तहत पुत्र और उसकी पत्नी छत पर बने कमरे में अलग रहेंगे, जबकि पिता और माता अपने अन्य बच्चों के साथ नीचे निवास करेंगे। इस निर्णय से परिवार में संतुलन और आपसी सम्मान बनाए रखने की उम्मीद जताई गई।
पूरी प्रक्रिया की जानकारी बबरगंज थाना प्रभारी को भी दे दी गई है और समझौते की एक प्रति थाने को सौंप दी गई, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की कानूनी जटिलता न उत्पन्न हो।
इस बैठक में संगठन के जिला अध्यक्ष प्रेम शंकर तिवारी, जिला सचिव सुबोध शर्मा, मीडिया प्रभारी मनीष राम सहित कई पदाधिकारी उपस्थित रहे। बैठक का नेतृत्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. ईशान सिन्हा ने किया। उन्होंने कहा कि मानवाधिकार का उद्देश्य सिर्फ न्याय दिलाना नहीं, बल्कि परिवार और समाज में शांति व सौहार्द बनाए रखना भी है।


