Patna News: बिहार की वास्तुकला और आधुनिक निर्माण शैली ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमाई है। भवन निर्माण विभाग द्वारा निर्मित पटना के ‘बापू टावर’ और वैशाली के ‘बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय एवं स्मृति स्तूप’ को प्रतिष्ठित 17वें CIDC विश्वकर्मा अवॉर्ड्स-2026 के लिए चुना गया है। यह सम्मान ‘Best Construction Projects’ श्रेणी में दिया गया है।
नीतीश कुमार की दूरदर्शिता को राष्ट्रीय पहचान
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मार्गदर्शन में बिहार अपनी ऐतिहासिक विरासत को आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ जोड़ रहा है। यह अवॉर्ड उसी विजन का प्रमाण है। विभाग के सचिव कुमार रवि ने इस उपलब्धि पर गर्व जताते हुए कहा, “यह हमारे इंजीनियर्स, आर्किटेक्ट्स और पूरी टीम की तकनीकी उत्कृष्टता और कड़ी मेहनत का परिणाम है। बिहार अब निर्माण के क्षेत्र में देश-दुनिया के सामने नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।”
परियोजनाओं की खास बातें: क्यों मिला यह सम्मान?
1. बापू टावर (पटना): गांधीजी की विरासत का आधुनिक केंद्र
गर्दनीबाग में स्थित यह टावर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को एक भव्य श्रद्धांजलि है।
- तकनीक का संगम: ऑडियो-विजुअल्स, म्यूरल्स और लघु फिल्मों के जरिए गांधीजी के जीवन को जीवंत किया गया है।
- शिक्षा और पर्यटन: यह केवल एक संग्रहालय नहीं, बल्कि छात्रों के लिए शोध और शिक्षा का एक बड़ा केंद्र बनकर उभरा है।
2. बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय (वैशाली): हजारों वर्षों तक सुरक्षित रहेगी विरासत
वैशाली की पावन धरती पर 72 एकड़ में फैला यह केंद्र बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए वैश्विक आस्था का केंद्र है।
- अद्वितीय संरचना: इसका निर्माण राजस्थान के प्रसिद्ध वंशी पहाड़पुर के बलुआ पत्थरों से किया गया है।
- भूकंपरोधी तकनीक: इसे अत्याधुनिक मॉडर्न तकनीकों से इस तरह बनाया गया है कि इसकी संरचना हजारों वर्षों तक सुरक्षित रहे।
- सुविधाएं: यहाँ संग्रहालय के साथ-साथ लाइब्रेरी, विजिटर सेंटर और एम्फीथिएटर जैसी विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध हैं।
बिहार के नाम पहले भी रही हैं कई उपलब्धियां
यह पहली बार नहीं है जब बिहार के निर्माण कार्य को वैश्विक सराहना मिली है। इससे पहले भी विभाग की दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं को विश्वकर्मा अवॉर्ड से नवाजा जा चुका है:
- सम्राट अशोक कन्वेंशन केंद्र, पटना
- अंजुमन इस्लामिया हॉल, पटना
पर्यटन को लगेंगे पंख
जुलाई 2025 में उद्घाटित बुद्ध स्मृति स्तूप और बापू टावर ने राज्य में पर्यटन की संभावनाओं को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। ये स्थल न केवल बिहार के सांस्कृतिक गौरव को बढ़ा रहे हैं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर राज्य की स्थिति को भी मजबूत कर रहे हैं।


