Patna News: बिहार की राजनीति एक बार फिर बड़े मोड़ पर खड़ी है। राज्य के मुख्यमंत्री Nitish Kumar 30 मार्च 2026 को बिहार विधान परिषद (MLC) की सदस्यता से इस्तीफा दे सकते हैं। उनके इस संभावित फैसले ने सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है और नए समीकरणों को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
दरअसल, हाल ही में Nitish Kumar राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं। भारतीय संविधान के नियमों के अनुसार कोई भी व्यक्ति एक साथ संसद और राज्य विधानमंडल दोनों का सदस्य नहीं रह सकता। ऐसे में उन्हें तय समय सीमा के भीतर किसी एक पद से इस्तीफा देना अनिवार्य है। सूत्रों के मुताबिक, वे विधान परिषद की सदस्यता छोड़कर राज्यसभा में अपनी नई भूमिका निभाने की तैयारी में हैं।
30 मार्च इस पूरे घटनाक्रम के लिए अहम तारीख मानी जा रही है, क्योंकि इसी दिन तक उन्हें अपना अंतिम निर्णय लेना होगा। अगर वे निर्धारित समय में इस्तीफा नहीं देते हैं, तो उनकी राज्यसभा सदस्यता स्वतः समाप्त हो सकती है। यही कारण है कि राजनीतिक स्तर पर गतिविधियां तेज हो गई हैं और हर किसी की नजर इस फैसले पर टिकी हुई है।
हालांकि सबसे बड़ा सवाल अब भी बना हुआ है—क्या Nitish Kumar मुख्यमंत्री पद भी छोड़ेंगे? राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो वे पहले विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा देंगे और कुछ समय तक मुख्यमंत्री बने रह सकते हैं। इसके बाद राज्यसभा में शपथ लेने के पश्चात वे आगे का फैसला कर सकते हैं।
इस संभावित बदलाव के बीच बिहार में सत्ता संतुलन को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। एनडीए गठबंधन के भीतर नेतृत्व परिवर्तन और नए मुख्यमंत्री के नाम को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं। भाजपा और जदयू के बीच संभावित रणनीति पर भी मंथन जारी है।
कुल मिलाकर, 30 मार्च का दिन बिहार की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। Nitish Kumar का यह कदम न सिर्फ उनके राजनीतिक भविष्य को प्रभावित करेगा, बल्कि राज्य की सत्ता संरचना में भी बड़ा बदलाव ला सकता है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि वे आगे कौन सा बड़ा फैसला लेते हैं।
30 मार्च को बड़ा फैसला! नीतीश कुमार छोड़ेंगे विधान परिषद की सदस्यता, बिहार की राजनीति में हलचल तेज
राज्यसभा सदस्य बनने के बाद संवैधानिक मजबूरी में MLC पद से इस्तीफा तय, मुख्यमंत्री पद को लेकर सस्पेंस बरकरार


