Bhagalpur News: समाज में रिश्तों के बिखरने और बुजुर्गों की अनदेखी की एक मर्मस्पर्शी तस्वीर आज उस समय सुकून में बदल गई, जब दर-दर भटक रही 65 वर्षीय वृद्ध महिला रेणु देवी को शरण्य राष्ट्रीय मानवाधिकार संस्था के प्रयासों से नया आशियाना मिला। पति के देहांत के बाद अपनों द्वारा बेसहारा छोड़ दी गई इस वृद्धा के लिए संस्था के सदस्य ‘बजरंगबली’ बनकर सामने आए और उन्हें स्वाभिमान के साथ जीने का हक दिलाया।
अपनों की बेरुखी और दर-दर की ठोकरें
65 वर्षीय रेणु देवी की कहानी बेहद हृदयविदारक थी। पति के स्वर्गवास के बाद बेटा-बेटी और रिश्तेदारों ने उनका साथ छोड़ दिया। रहने और खाने की समस्या के बीच वे सड़कों पर भटकने को मजबूर थीं। इस उम्र में कोई सहारा न देख उनकी आंखों के आगे अंधेरा छा गया था। इसी दौरान भागलपुर जिला मानवाधिकार सचिव सुबोध शर्मा की नजर उन पर पड़ी, जिसके बाद उनकी किस्मत बदल गई।
मानवाधिकार संस्था की तत्परता और प्रशासनिक पहल
सुबोध शर्मा वृद्ध महिला को सम्मानपूर्वक संस्था के कार्यालय लेकर आए। इसके बाद मानवाधिकार के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. ईशांत सिन्हा के निर्देशन में त्वरित कार्रवाई शुरू की गई।
- विभागीय समन्वय: संस्था ने समाज कल्याण विभाग, भागलपुर से संपर्क किया।
- सत्यापन प्रक्रिया: वार्ड संख्या 42 के पार्षद से संपर्क कर आवश्यक जानकारी जुटाई गई और आवेदन की प्रक्रिया पूरी की गई।
- पुलिस को सूचना: स्थानीय बबरगंज थाना को भी इस मानवीय पहल की औपचारिक सूचना दी गई।
‘सहारा वृद्धाश्रम’ में मिली नई जिंदगी
सभी कानूनी और विभागीय कागजात पूरे होने के बाद, रेणु देवी को पूरे सम्मान के साथ घंटी पोखर स्थित ‘सहारा वृद्धाश्रम’ पहुंचाया गया। वृद्धाश्रम की चौखट पर कदम रखते ही रेणु देवी की आंखों में खुशी के आंसू छलक आए। उन्होंने राहत की सांस लेते हुए संस्था के सदस्यों को हृदय से आशीर्वाद दिया।
सेवा कार्य में जुटे रहे ये दिग्गज
इस नेक कार्य को सफल बनाने में मानवाधिकार के लीगल एडवाइजर एडवोकेट राजेश कुमार जायसवाल, प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट कुणाल सिंह, अध्यक्ष प्रेम कुमार तिवारी, मीडिया प्रभारी मनीष राम, सामाजिक कार्यकर्ता देव मिश्रा और दीपक यादव ने सक्रिय भूमिका निभाई। संस्था के सदस्यों ने संकल्प लिया कि वे समाज के ऐसे उपेक्षित वर्गों के लिए हमेशा ढाल बनकर खड़े रहेंगे।


