Patna News: बिहार दिवस के अवसर पर राजधानी पटना के गांधी मैदान में आयोजित कार्यक्रम में कला एवं संस्कृति विभाग का भव्य पवेलियन लोगों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन गया। “सेलिब्रेटिंग प्राइड, हेरिटेज एंड कल्चर” थीम पर आधारित इस पवेलियन का उद्घाटन कला एवं संस्कृति मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने किया।
पारंपरिक और आधुनिक तकनीक का अनूठा मेल
इस पवेलियन की खास बात यह रही कि यहां बिहार की समृद्ध कला और सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक तकनीक के साथ प्रस्तुत किया गया। डिजिटल इंटरैक्टिव कियोस्क और गेम्स के माध्यम से आगंतुकों को रोचक अंदाज में बिहार की परंपराओं और इतिहास से परिचित कराया जा रहा है। यह पहल खासकर युवाओं और बच्चों के लिए बेहद आकर्षक साबित हो रही है।
वीआर तकनीक से ऐतिहासिक स्थलों का अनुभव
पवेलियन में लगाए गए वीआर (वर्चुअल रियलिटी) अनुभव केंद्र ने लोगों को खासा आकर्षित किया। इसके जरिए दर्शक बिहार के प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों का वर्चुअल भ्रमण कर पा रहे हैं। मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने स्वयं वीआर हेडसेट का अनुभव लिया और इसे अत्यंत रोचक एवं सराहनीय पहल बताया।
ऐतिहासिक धरोहरों की झलक
पवेलियन में बिहार की ऐतिहासिक धरोहरों को भी प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया है। बाराबर गुफाएं और केसरिया स्तूप जैसे महत्वपूर्ण स्थलों की झलक देखने को मिल रही है, जो दर्शकों को राज्य के गौरवशाली इतिहास से जोड़ने का काम कर रही है।
लोक कला और शिल्प का जीवंत प्रदर्शन
इस आयोजन में बिहार की पारंपरिक लोक कलाओं को भी विशेष स्थान दिया गया है। जूट कला, मंजूषा कला, सुजनी कढ़ाई, मधुबनी चित्रकला और टिकुली कला को बेहद आकर्षक तरीके से प्रस्तुत किया गया है। कलाकारों द्वारा लाइव प्रदर्शन और उनके उत्पादों की प्रदर्शनी भी लोगों को काफी आकर्षित कर रही है।
फोटो प्वाइंट और विजुअल इंस्टॉलेशन बने खास आकर्षण
पवेलियन में बनाए गए आकर्षक फोटो प्वाइंट और विजुअल इंस्टॉलेशन भी आगंतुकों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचकर तस्वीरें खिंचवा रहे हैं और बिहार की सांस्कृतिक विरासत के साथ अपने जुड़ाव को महसूस कर रहे हैं।
अधिकारियों की मौजूदगी ने बढ़ाई गरिमा
इस अवसर पर कला एवं संस्कृति विभाग के सांस्कृतिक कार्य निदेशालय की निदेशक श्रीमती रूबी और संग्रहालय निदेशालय के निदेशक कृष्ण कुमार सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे, जिनकी मौजूदगी ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ा दिया।
बिहार दिवस पर लगाया गया यह पवेलियन न केवल राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाता है, बल्कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम भी बन रहा है। यह आयोजन बिहार की पहचान, परंपरा और प्रगति का शानदार संगम प्रस्तुत करता है।


