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हर्षोल्लास के साथ मनाया गया बिहार कृषि विश्वविद्यालय का 13 वां स्थापना दिवस, कृषि मंत्री ने कहा-बीएयू देश के समृद्ध विश्वविद्यालयों में से एक है

रिपोर्ट – रवि शंकर सिन्हा

सिल्क टीवी भागलपुर (बिहार) : भागलपुर के सबौर स्थित बिहार कृषि विश्वविद्यालय का 13 वां स्थापना दिवस शुक्रवार को हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।

कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन बिहार सरकार के कृषि मंत्री अमरेंद्र प्रताप सिंह, कृषि विभाग के सचिव डॉ. एन सरवण कुमार, हैदराबाद इंडियन मिलेट रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिक डॉ. संगप्पा, राजेंद्र प्रसाद कृषि विश्वविद्यालय पूसा की डॉ. श्वेता मिश्रा और बिहार कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अरुण कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्जवलित कर किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता बीएयू सबौर के कुलपति डॉ. अरुण कुमार ने की। इस दौरान पोषण अनाजों की खेती को बढ़ावा देने के लिए किसान वैज्ञानिक और कृषि पदाधिकारी समागम का आयोजन किया गया, जिसे सम्बोधित करते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि बिहार कृषि विश्वविद्यालय देश के समृद्ध विश्वविद्यालयों में से एक है और इसकी प्रशंसा राष्ट्रीय स्तर पर की जाती है।

कृषि मंत्री ए. पी. सिंह ने कहा कि अपने स्थापना के 12 वर्षों में बीएयू ने अपने वैज्ञानिकों और पूरी टीम की कड़ी मेहनत से राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कई उपलब्धियां हासिल की है।

इसके अलावा कृषि मंत्री अमरेंद्र प्रताप सिंह ने विश्वविद्यालय परिसर में पौधारोपण भी किया, जबकि प्रबंधन की ओर से कुलपति और बीएयू के निदेशक शोध डॉ. पी के सिंह ने कृषि मंत्री का स्वागत किया।

वहीं बिहार कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अरुण कुमार ने कहा कि यह विश्वविद्यालय कृषि विकास और किसानों के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, और राज्य सरकार की पहल पर किसान कम लागत पर अधिक मुनाफे वाली खेती कर सकें, इसके लिए जलवायु अनुकूल तकनीकों को सहारा लिया जा रहा है।

कुलपति ने कहा कि इस दिशा में विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने सूखे को बर्दाश्त करने वाली सबौर हर्षित धान की किस्म और बाढ़-सुखाड़ में भी अच्छी पैदावार देने वाली सबौर संपन्न प्रभेद को विकसित करने में सफलता पाई है, जो किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा है।

उद्घाटन सत्र में इंडियन मिलेट रिसर्च इंस्टीट्यूट हैदराबाद के वैज्ञानिक डॉ. संगप्पा और डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद कृषि विश्वविद्यालय पूसा कि डॉक्टर श्वेता मिश्रा ने क्रमश पोषक अनाज के उत्पादन प्रसंस्करण एवं गुणवत्ता संवर्धन के माध्यम से उधमिता विकास और बिहार में कदन्न फसल की चुनौती एवं

अवसर पर अपना विचार साझा किया, जबकि इसी क्रम में भोजपुर से आए किसान अजब नारायण सिंह और जमुई से आई रिंकी हांसदा ने भी मोटे अनाज की खेती के अनुभव को साझा किया।

बिहार सरकार कृषि विभाग के उपनिदेशक सस्य अनिल झा ने कहा कि वेद और बायोटेक्नोलॉजी का यह विश्वविद्यालय संगम स्थल है। उपनिदेशक सस्य अनिल झा ने कहा कि जलवायु अनुकूल खेती के लिए मिलेट और फसल विविधीकरण को प्रोन्नत किया जा रहा है, जबकि इसमें सोयाबीन भी शामिल है, और यह पोषण सुरक्षा का सहज रास्ता बनेगा।

उन्होंने कहा कि पोषक अनाज को लेकर इंडियन मिलेट रिसर्च इंस्टीट्यूट हैदराबाद से जल्द एक स्थाई करार किया जाएगा। उप निदेशक सस्य ने कहा कि अगले 10 वर्षों के लिए नया कृषि रोडमैप तैयार किया जा रहा है, जिसमें कृषि विकास को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिकों एवं छात्रों का सुझाव भी समाहित किया जाएगा।

इस दौरान मंचासीन अतिथियों ने पोषक अनाज एक झलक स्मारिका, तकनीकी बुलेटिन जलवायु अनुकूल कृषि में सॉवा, ज्वार, छीना, कोदो और रागी का महत्व एवं उत्पादन तकनीक का विमोचन करने के साथ स्कूल ड्राप आउट युवाओं के लिए सर्टिफिकेट कोर्स की भी शुरुआत की

समारोह के मौके पर नवनिर्मित भवनों का उद्घाटन, पोषक अनाजों के प्रति जागरूकता के लिए किसान-वैज्ञानिक-कृषि पदाधिकारी का समागम, और पूर्ववर्ती छात्रों का मिलन समारोह सह सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का संचालन बीएयू के सामुदायिक रेडियो की आर. जे. अनु कुमारी ने किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन विश्वविद्यालय के सह निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. आर एन सिंह ने किया।

मौके पर निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. आर. के. सोहाने, प्रो. जेड. ए. हैदर, बीएयू के सभी डीन-डायरेक्टर, विभिन्न कॉलेजों के प्राचार्य और विवि के पीआरओ डॉ. शशिकांत समेत कई सम्मानित अतिथि, किसान और बीएयू परिवार के छात्र छात्रा एवं कर्मी मौजूद रहे।

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