Home भागलपुर हमारी भी सुनो सरकार : अब तो खोलने दो प्राईवेट स्कूल-कोचिंग...

हमारी भी सुनो सरकार : अब तो खोलने दो प्राईवेट स्कूल-कोचिंग…

रिपोर्ट – सैयद ईनाम उद्दीन

सिल्क टीवी/भागलपुर (बिहार) :कोरोना महामारी के कारण निजी कोचिंग संचालकों की आर्थिक स्थिति काफी दयनीय हो गई है। मार्च के शुरुआत से ही प्रदेश के सारे कोचिंग संस्थान बंद चल रहे हैं। वहीं प्राईवेट स्कूल-कोचिंग खोलने की मांग को लेकर बुधवार को भागलपुर में प्राइवेट टीचर्स एसोसिएशन की ओर से आक्रोश मार्च निकाला गया। इस दौरान शिक्षकों ने रानी लक्ष्मीबाई चौक से कचहरी चौक तक भिक्षाटन किया। साथ ही सरकार से 6 जुलाई से प्राईवेट स्कूल कोचिंग खोले जाने का आदेश जारी करने की मांग की। शिक्षकों ने बताया कि सरकार जो गाइडलाइन जारी करती है, उसमें यूनिवर्सिटी-कॉलेज का ज़िक्र तो होता है, लेकिन कोचिंग संस्थानों के बारे में कोई चर्चा नहीं होती। पीटीए के अध्यक्ष अमरेन्द्र कुमार यादव ने कहा कि ज्यादातर कोचिंग संस्थान किराए के मकान में चलते हैं। ऐसे में किराए के साथ अब जीवन-यापन करना कठिन हो गया है। वहीं शिक्षक सुधाकर मिश्रा, संतोष कुमार, डॉ. अभय कुमार और आर. के. झा ने कहा कि कोरोना के कारण प्रदेश में 10 हजार से अधिक निजी स्कूल बंद हैं और इन स्कूलों में पढ़ाने वाले करीब 50 हजार से अधिक शिक्षक बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं। उन्होंने बताया कि भागलपुर में कई शिक्षक आर्थिक तंगी और डिप्रेशन के कारण मौत के शिकार भी हो गए, लेकिन जिला प्रशासन की ओर से उनके परिजनों को किसी तरह की सहायता राशि नहीं दी गई। प्राइवेट टीचर्स एसोसिएशन से जुड़े शिक्षको ने बताया कि अपनी मांग को लेकर उन लोगों ने 25 जून को भागलपुर जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन को आवेदन भी दिया था। इधर शिक्षक राकेश कुमार, विनय कुमार, अजय यादव और उमाशंकर शर्मा ने जिला प्रशासन से कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए शिक्षण संस्थान खोले जाने की अनुमति मांगी है। वहीं भिक्षाटन कर रहे जे.पी उजाला, काजी जिन्ना, समीउल होदा, आलोक कुमार, ए.के. अमन सहित कई शिक्षक ने सरकार से पांच लाख का राहत पैकेज निजी कोचिंग-स्कूल संचालकों को जल्द देने की मांग की। साथ ही बिजली बिल और मकान किराया माफ करने की बात कही। पीटीए ने कहा कि हम लोग विकट परिस्थिति में भी सरकार और प्रशासन का सहयोग कर रहे हैं लेकिन सरकार हमारी मांग पर ध्यान नहीं दे रही, इसलिए सड़क पर उतरकर आंदोलन करना हमारी मजबूरी है।

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