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सर्पदंश पर कार्यशाला का हुआ आयोजन, डॉक्टरों ने कहा एंटी वेनम है उपचार लेकिन झाड़ फूंक के चक्कर में चली जाती है जान….

रिपोर्ट – सैयद ईनाम उद्दीन

सिल्क टीवी/भागलपुर (बिहार) : जीवन जागृति सोसायटी और आपदा प्रबंधन विभाग के संयुक्त तत्वाधान में रविवार को भागलपुर पटल बाबू रोड स्थित एक होटल में सर्पदंश के विभिन्न पहलुओं पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें ग्रामीण चिकित्सकों को सर्पदंश और कुत्ते के काटने पर ईलाज की विस्तृत जानकारी दी गई।

इसके पूर्व कार्यशाला का उदघाटन सिविल सर्जन डॉ. उमेश शर्मा, डिजास्टर मैनेजमेंट के विकास कुमार कर्ण, एसडीआरएफ इंस्पेक्टर गणेशजी ओझा, जदयू चिकित्सा प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार सिंह, डॉ. आरपी जायसवाल और आगत अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। वहीं चिकित्सकों ने बताया कि भारत में जागरूकता के अभाव में सर्पदंश की घटनाएं अधिक होती है। एक रिर्पोट का हवाला देते हुए डॉक्टर अजय ने बताया कि दुनिया में सांप काटने से मौत की आधी घटनाएं भारत में दर्ज होती हैं और इसका सबसे ज्यादा शिकार किसान, मजदूर, शिकारी, सपेरे, आदिवासी और प्रवासी लोग होते हैं।

सिविल सर्जन डॉ. उमेश शर्मा ने बताया कि देश में सर्पदंश की घटनाएं इसलिए ज्यादा है, क्योंकि सांप काटने और उससे बचने के तरीके के बारे में यहां के लोगों के बीच जागरूकता की कमी है। साथ ही कहा कि सांप काटने के बाद तुरंत प्राथमिक उपचार मिल जाए तो पीड़ित व्यक्ति की जान बचाई जा सकती है। लेकिन प्राथमिक उपचार के बजाय लोग अंधविश्वास ओझा और हकीम के चक्कर में पढ़ कर अपनी जान गंवा देते हैं। सिविल सर्जन ने बताया कि सभी सरकारी अस्पताल में एंटी वेनम उपलब्ध है।

वर्कशॉप में एसडीआरएफ इंस्पेक्टर गणेशजी ओझा ने जानकारी दी कि अक्सर लोग विषधर और विषहीन सांपों में अंतर ही नहीं कर पाते। उन्होंने बताया कि अगर सांप काट ले तो सबसे पहले डॉक्टर के पास जाना चाहिए। इस दौरान वरीय चिकित्सक डॉक्टर आरपी जायसवाल ने कहा कि सर्पदंश होने पर एंटी वेनम इसका उपचार है, लेकिन अक्सर लोगों की जान झाड़ फूंक के चक्कर में चली जाती है।

उन्होंने बताया कि सर्प दंश का इलाज सरकारी अस्पताल में मुफ्त होता है। कार्यक्रम में ग्रामीण चिकित्सकों को विषैले और विषहीन सांपों का अंतर भी समझाया गया। मौके पर डॉ. ओमनाथ भारती, डॉ. अमित कुमार, गौरव कुमार सहित जीवन जागृति सोसाइटी से जुड़े सदस्य और विभिन्न प्रखंडों से आए ग्रामीण चिकित्सक मौजूद थे।

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