बिहारभागलपुर

समारोह पूर्वक मनाई गई शहीद तिलकामांझी की जयंती, टीएमबीयू में स्थापित होगी आदमकद प्रतिमा

रिपोर्ट – सैयद ईनाम उद्दीन

सिल्क टीवी/भागलपुर (बिहार) : भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के पहले सेनानी तिलकामांझी की 272वीं जयंती शुक्रवार को मनाई गई। इस अवसर पर विश्वविद्यालय से लेकर विभिन्न संगठनों की ओर से कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें याद किया गया।

तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय प्रशासनिक भवन परिसर में उनकी प्रतिमा पर विश्वविद्यालय के अधिकारियों, कर्मियों और छात्र छात्राओं ने पुष्प अर्पित कर नमन किया। इस दौरान अमर शहीद बाबा तिलका मांझी का जन्म दिवस केक काटकर समारोह पूर्वक मनाया गया।

केक काटकर तिलकामांझी की जयंती मनाते विश्वविद्यालय के अधिकारी व कर्मी

वहीं टीएमबीयू के डीएसडब्ल्यू प्रो. रामप्रवेश सिंह और रजिस्ट्रार डॉ. निरंजन प्रसाद यादव ने बताया कि जल्द ही विश्वविद्यालय में शहीद तिलकामांझी की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक भवन के गार्डन को अब तिलकामांझी वाटिका के नाम से जाना जाएगा।

अधिकारियों की माने तो फिलहाल जो प्रतिमा स्थापित है उसे हटाकर प्रशासनिक भवन प्रवेश द्वार के सामने शिफ्ट किया जाएगा और उस स्थान पर आदमकद् प्रतिमा स्थापित की जाएगी।

कार्यक्रम में अंबेडकर विचार विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. विलक्षण रविदास ने कहा कि 1857 के सिपाही विद्रोह से लगभग सौ साल पहले आंदोलन का बिगूल फूंकने वाले तिलकामांझी को इतिहास में तवज्जो नहीं दी गई। उन्होंने बताया कि इतिहास में तिलका मांझी को प्रथम स्वतंत्रता सेनानी के रूप में स्थान मिलना चाहिए।

लेकिन इतिहासकारों ने उनकी भूमिका का सही मूल्यांकन ही नहीं किया। प्रो. विलक्षण ने बताया कि विश्वविद्यालय का नाम तिलकामांझी के नाम पर है। लेकिन यहां उनके व्यकतित्व और कृतित्व पर शोध का काम नहीं दिखता। जिससे उनके जीवन के बारे में कई जानकारियां अब तक प्रकश में नहीं आ सकी हैं।

प्रॉक्टर प्रो. रतन मंडल ने कहा कि तिलकामांझी ब्रिटिश शासक को चुनौती देने वाले प्रारंभिक क्रांतिकारियों में से एक थे। रजिस्ट्रार डॉ. निरंजन प्रसाद यादव ने अपने संबोधन में बताया कि ब्रिटिश सरकार ने उन्हें तिलका का नाम दिया था। जबकि उनका असली नाम जबरा पहाड़िया था। डॉ. निरंजन ने कहा कि पहाड़िया भाषा में तिलका का अर्थ होता है, गुस्सैल यानी लाल-लाल आंखों वाला व्यक्ति।

चूंकि वे ग्राम प्रधान थे और पहाड़िया समुदाय में ग्राम प्रधान को मांझी कहकर पुकारने की प्रथा है। मौके पर वित्त परामर्शी मधुसूदन, एनएसएस समन्वयक डॉ. अनिरूद्ध कुमार, पीआरओ डॉ. दीपक कुमार दिनकर समेत कई अधिकारी, कर्मी और स्टूडेंट्स मौजूद थे।

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