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शारदीय नवरात्र के तीसरे दिन की गई माँ दुर्गा के तृतीय स्वरूप माता चंद्रघंटा की पूजा

शारदीय नवरात्र के तीसरे दिन माँ दुर्गा के तृतीय स्वरूप माता चंद्रघंटा की पूजा अर्चना की गई। इस दौरान जिले के सभी ग्रामीण और शहरी क्षेत्र स्थित मंदिरों के अलावा घरों में भी भक्तों ने माता चंद्रघंटा की पूजा पूरे विधि विधान से वैदिक मंत्रोच्चार और दुर्गा सप्तशती का पाठ किया। 

 

 

 

मां चंद्रघंटा बाघ की सवारी करती हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर नकारात्मक शक्तियों को नष्ट कर भय से मुक्ति दिलाने वाली है। माता का यह स्वरूप स्वर्ण के समान चमकीला, शांति, चन्द्रमा की तरह शीतलता, सुख समृद्धि, के साथ अत्यंत परोपकारी होने के साथ साहस और वीरता का प्रतीक है। 

 

धार्मिक मान्यता के अनुसार महिषासुर ने जब तीनों लोकों में आतंक मचाना शुरू कर दिया तब सभी देवी देवताओं ने जगत पिता ब्रह्मा, पालनकर्ता भगवान विष्णु और महादेव से महिषासुर के आतंक से मुक्ति के लिए विनती की, जिसके बाद क्रोधित हुए त्रिदेव के मुख से निकली ऊर्जा से माता चंद्रघंटा का प्रादुर्भाव हुआ, और सभी देवताओं ने उन्हें अपने अपने अस्त्र शस्त्र एवं शक्तियां प्रदान की। माता लक्ष्मी, सरस्वती, और जया विजया को भी मां चंद्रघंटा का स्वरूप माना जाता है।

 

वहीं मां पार्वती के रौद्र रूप देवी चंद्रघंटा को कमल और पीला गुलाब फूल की माला अति प्रिय है। इधर दुर्गा पूजा को लेकर शहर में माहौल भक्तिमय हो गया है, और हर ओर सप्तशती पाठ, मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालु एवं पूजा समिति मेला की तैयारी में जुटे है। जबकि पंडाल निर्माण कार्य भी तेजी से किया जा रहा है।  

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