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वट सावित्री व्रत को लेकर सुहागिन महिलाओं ने की वट वृक्ष की पूजा, पति के दीर्घायु होने के लिए की कामना…

रिपोर्ट – रवि शंकर सिन्हा

सिल्क टीवी भागलपुर (बिहार) : भागलपुर में वट सावित्री व्रत को लेकर गुरूवार को जगह-जगह वट वृक्ष के पास पूजन के लिए सुबह से ही सुहागिन महिलाओं की भारी भीड़ जुटनी शुरू हो गयी। पति की लम्बी आयु और समृद्धि की कामना को लेकर किये जाने वट सावित्री पूजन की आस्था के सामने महिलाओ में कोरोना का खौफ नही देखा गया। जिले के शहरी क्षेत्र के अलावा सुल्तानगंज, नवगछिया, कहलगांव, पीरपैंती, नाथनगर समेत सभी श्री और ग्रामीण इलाकों में सुहागिनों के बीच वट सावित्री व्रत को लेकर खासा उत्साह देखा गया। इस दौरान सोलहों श्रृंगार कर सुहागिन महिलाओं ने वट वृक्ष की पूजा कर कच्चे धागे के साथ वट वृक्ष की परिक्रमा की और अपने पति की लंबी उम्र और सुखद वैवाहिक जीवन की कामना की। सत्यवान और सती सावित्री से जुड़ी कथा के अनुसार वट सावित्री पूजन व्रत का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस व्रत को रखने से पति पर आए संकट दूर हो जाते हैं, और दीर्घायु की प्राप्ति होती है। यही नहीं अगर दांपत्य जीवन में कोई परेशानी चल रही हो, तो वो भी इस व्रत के प्रताप से दूर हो जाती है। सुल्तानगंज में सुहागिन महिलाएं ने बरगद के पेड़ के नीचे फल, फूल, धूप, दीप, नैवेद्य समेत पूजन सामग्रियों से वट वृक्ष में कलावा बांधकर वृक्ष की परिक्रमा की, और अपने पति के जीवन में आने वाली अदृश्य बाधाओं को दूर करने की कामना की। पौराणिक मान्यता है कि आज के दिन सावित्री ने मृत्यु के देवता यमराज से अपने दृढ निश्चय और सतीत्व की शक्ति के बल पर पति सत्यवान के प्राण वापस ले आई थी। तभी से अखंड सौभाग्य के लिए सुहागिन महिलाओं द्वारा वट सावित्री पर्व की परंपरा शुरू हुई, जो प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ मास की अमावस्या  तिथि को की जाती है। आज के दिन बरगद के पेड़ के नीचे पूजा अर्चना कर सावित्री और सत्यवान की कथा सुनकर व्रत पूरा किया जाता है, जबकि पूजन के बाद सुहागिन अपने पति का चरण स्पर्श करने और पंखा झेलने की परंपरा का निर्वहन करती है। 

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