Home धर्म माँ दुर्गा में नवम स्वरूप सिद्धिदात्री की हुई पूजा

माँ दुर्गा में नवम स्वरूप सिद्धिदात्री की हुई पूजा

रिपोर्ट – रवि शंकर सिन्हा

भागलपुर (बिहार) : शारदीय नवरात्र के आठवें और अंतिम दिन गुरूवार को मां दुर्गा के नवम स्वरूप माता सिद्धिदात्री की पूजा पूरे विधि विधान से वैदिक मंत्रोच्चार और सप्तशती पाठ कर की गई। गुरुवार को भागलपुर के सभी शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के दुर्गा मंदिरों एवम् पूजा पंडालों में मां दुर्गा के सिद्धिदात्री स्वरूप की पूजा कर कन्या पूजन और हवन किया गया। सभी दुर्गा मंदिरों में अलग अलग जगहों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन कर महानवमी पूजन किया।

वहीं महाअष्टमी गुरुवार को सुबह से मां सिद्धिदात्री की पूजा के लिए मंदिरों में भक्तों कोभीड़ जुटने लगी, और मंदिर के आसपास का इलाका दुर्गा सप्तशती पाठ, संपुट मंत्र, भक्ति गीत और माता रानी के जयकारे से गूंजता रहा। धार्मिक मान्यता के अनुसार देवी दुर्गा का नवम स्वरूप माता सिद्धिदात्री महालक्ष्मी के समान कमल के आसन पर विराजमान होती हैं, और ये अपने भक्तों को सिद्धि एवम् मोक्ष प्रदान करने वाली हैं। चारभुजा देवी सिद्धिदात्री शंख, चक्र, गदा एवम् कमल धारण करती हैं, और वे यश, बल, धन देनेवाली हैं। अष्टसिद्धियों को धारण करनेवाली देवी सिद्धिदात्री की दुर्गा महानवमी पर सच्चे मन से आराधना करने वाले भक्तों मनोकामना पूरी करने के साथ अष्टसिद्धियों की सहायता से मोक्ष का मार्ग प्रदान करती हैं।

मां सिद्धिदात्री को माता महासरस्वती का रूप माना जाता है, जिनकी उपासना करने से विद्या, बुद्धि और समृद्धि की प्राप्ति है। इन्हें मौसमी फल, चना, गुड़, खीर नारियल, केला, दही, घी, हलवा और पान का भोग लगाया जाता है, जबकि कमल फूल एवम् लाल फूल चढ़ाकर इनकी पूजा की जाती है। जबकि बांग्ला समेत कई पूजा पंडालों में भी हर्षोल्लास के साथ मां दुर्गा के नौवें स्वरूप की पूजा नियम पूर्वक की गई। वहीं माता सिद्धिदात्री की पूजा कर दो से दस वर्ष तक की कन्याओं की देवी के अलग अलग रूप में पूजा की गई, जिसके बाद देवीरूपी कन्या को भोजन भी कराया गया। ऐसी मान्यता है की बिना कन्या पूजन और हवन के नवरात्र का व्रत पूरा नहीं माना जाता है। इसी के साथ नवरात्रि भी पूरी हो गई।

इधर मां दुर्गा के सिद्धिदात्र स्वरूप की विशेष पूजा एवम् आरती के दौरान शंख, घड़ीघंट, और ढोल ढाक बजाकर मां की पूजा अर्चना की गई। बांग्ला विधि से माता की पूजा और आरती में ढाक बजाने की परंपरा रही है, जिसके कारण अन्य पूजा पंडालों में भी ढाक बजाने की परंपरा शुरू हो गई है। ऐसी मान्यता है की, इससे मां प्रसन्न होती हैं । वहीं गुरुवार को भी शहर के मारवाड़ी पाठशाला परिसर, मुंदीचक गढ़ैया, कचहरी चौक, आदमपुर चौक, बड़ी खंजरपुर, भीखनपुर मिश्रा टोला दुर्गा मंदिर, मिर्जानहाट दुर्गा मंदिर, गुड़हट्टा चौक समेत दर्जनों पूजा पंडाल में दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ जुटी रही। पूजा समारोह को लेकर आयोजन समिति की ओर से तमाम तरह के इंतजाम किए गए है, जबकि पूजा मेला के दौरान किसी तरह की बाधा उत्पन्न ना हो इसके लिए विधि व्यवस्था को लेकर जिला और पुलिस प्रशासन की ओर से जगह सुरक्षाबलों की भी तैनाती की गई है।

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