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महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने किशोर न्याय मॉडल नियम, 2016 में संशोधन पर मांगे टिप्पणियां एवं सुझाव

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) मॉडल नियम, 2016 में संशोधन के मसौदे पर सभी हितधारकों से टिप्पणियां/सुझाव आमंत्रित किए हैं। सभी हितधारकों से अनुरोध किया जाता है कि वे उपरोक्त नियमों पर अपनी टिप्पणी/सुझाव 11.11.2021 तक ई-मेल आईडी cw2section-mwcd@gov.in पर भेज दें।

किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2021,को 28 जुलाई, 2021 को राज्यसभा में पारित किया गया था। इस विधेयक का उद्देश्य किशोर न्याय अधिनियम, 2015 में संशोधन करना था। सरकार ने इस साल बजट सत्र में यह विधेयक संसद में पेश किया था। इसे 24.03.2021 को लोकसभा में पारित किया गया था।

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती स्मृति जुबिन ईरानी ने व्यवस्था में व्याप्त खामियों को ध्यान में रखते हुए संवेदनशील बच्चों की देखभाल और सुरक्षा की जिम्मेदारी जिलाधिकारियों को सौंपने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने देश के बच्चों को बाकी सभी मुद्दों पर प्राथमिकता देने के लिए संसद की प्रतिबद्धता को दोहराया।

संशोधनों में अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट सहित जिला मजिस्ट्रेट को किशोर न्याय अधिनियम की धारा 61 के तहत गोद लेने संबंधी आदेश जारी करने के लिए अधिकृत करना शामिल है, ताकि मामलों का त्वरित निपटान सुनिश्चित किया जा सके और जवाबदेही बढ़ाई जा सके। अधिनियम के तहत जिलाधिकारियों को इसके सुचारू कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के साथ-साथ संकट की स्थिति में बच्चों के पक्ष में समन्वित प्रयास करने के लिए और अधिक अधिकार दिए गए हैं। अधिनियम के संशोधित प्रावधानों के अनुसार, किसी भी बाल देखभाल संस्थान को जिला मजिस्ट्रेट की सिफारिशों पर विचार करने के बाद पंजीकृत किया जाएगा। जिला मजिस्ट्रेट स्वतंत्र रूप से जिला बाल संरक्षण इकाइयों, बाल कल्याण समितियों, किशोर न्याय बोर्डों, विशेषीकृत किशोर पुलिस इकाइयों, बाल देखभाल संस्थानों आदि के कामकाज का मूल्यांकन करेंगे।

किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) मॉडल नियम, 2016 में संशोधन के मसौदे को देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।

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